Sahityik Bagiya | साहित्यिक बगिया

यूँ तो सोशल मीडिया में जब से व्हाट्सएप्प और फेसबुक मंचों की एक बढ़कर एक बड़ी सी बड़ी खेप जारी हुई।निश्चित तौर पर यह सूचना जगत में एक क्रांतिकारी कदम था।एक बढ़कर एक मंच आज सोशल मीडिया पर साहित्य पताका फहरा रहे हैं, किन्तु साथ ही हजारों की तादाद में कुकुरमुत्तों के सदृश मंच पनप रहे थे,ऐसे में मात्र चलन के तौर पर हजारों पत्र पत्रिकायें बाजार में रखे सड़े माल के सामान उपलब्ध हैं। ऐसा नहीं था कि इस आपाधापी भरे लेखकीय युग में साहित्य सृजन हेतु स्तरीय पत्र पत्रिकायें साधारण जनमानस व आम पाठकजन सर्वसुलभ न हुये…किन्तु खेद का विषय है अच्छे पत्र बामुश्किल 6,7 व 8 या कह लें कि अंगुलियों की समगिनती के बराबर न थे।अतः व्हाट्सएप्प पर दिनांक 14-02-2014 को पहली बार पहला लेखकीय मंच मात्र आठ सदस्य प्रेरणा गुप्ता, आशुतोष शुक्ला “कैक्टस”, प्रियंका शर्मा, नेहा सिंह, अभिषेक द्विवेदी “खामोश”, श्रीमती कंचन मिश्रा, विजया बनर्जी अमरेश गौतम और गीतांजलि जी को लेकर प्रारंभिक स्तर पर पहला लेखकीय मंच शुरू किया था।
यह कहने में कोई संकोच नहीं समझता कि हम सभी सदस्य शिक्षा विभाग से सम्बद्ध रहे हैं।बस लेखकीय रूचि व लेखकीय हौसलों के चलते हम सबने लिखना प्रारंभ किया और कैसे छोटे से व्हाट्सएप्प पर गैर लेखकीय मंच ने 22-05-2015 को फेसबुक पर पहला लेखकीय मंच वृहद स्तर पर तैयार किया….देखते ही देखते फेसबुक पर उपलब्ध कई जाने माने लेखक/कवि/ कवित्रियों यथा श्रीमती अलका प्रकाश,श्रीमती प्रज्ञा पाण्डे, श्रीमती आरती तिवारी,प्रो0- चन्द्रेश्वर पाण्डे, अनुराग सिंह बेबाकी,”रू” पत्रिका के संपादक कुमार वीरेन्द्र भाई डा प्रेमदास गुप्ता जी, आदरणीय बी एम सैनी ने, न केवल इस फेसबुक मंच पर अपनी पोस्ट जारी की साथ ही मंच पर लेखकीय कौशल के विस्तार व उन्नयन हेतु महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध करायी। मंच पर इन सभी कवि/कवयित्रियों ने कुशल नेतृत्व भी प्रदान किया।अब मंच शैनेः शैनेः साहित्यिक कलेवर ले चुका था।और बहुत ही कम समय में ही सदस्यों की संख्या 478 (लगभग 500 सदस्य) हो चली है।

मंच पर उपस्थित सभी कवि कवयित्रियों से व्यापक विचार विमर्श के बाद 19-10-2015 को साहित्यिक बगिया की नई वर्ल्ड वेबसाइट भी जारी की।आज समय की आवश्यकता है कि साहित्यिक बगिया प्रकाशन स्वयं को व्हाट्सएप्प फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर उपलब्ध पाठक वर्ग को ध्यान में रखते हुये बस नवोदित रचनाकारों के लिये एक (इंटरनेट पत्रिका) ई-पत्रिका “ऋतज” आज दिनांक 01-01-2016 को सोशल मीडिया जगत के बीच प्रतिस्पर्धा से कहीं परे पूर्ण आत्मिक व लेखकीय साहित्यिक उन्नयन हेतु जारी कर रहा हूँ। आप सभी नवोदित रचनाकारों से निवेदन है कि साहित्य बगिया प्रकाशन के लिये एक बढकर एक स्तरीय रचना भेजें।
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आज के युवा लेखक और कवियों के बारे में कोई जानकारी भले ही न हो किन्तु आज कल हिन्दी के रचनाकारों की कमी है, वजह यह है कि आज का प्रतिभाशाली रचनाकार केवल फेसबुक तक सीमित रह गया है। वह अगर कुछ अदभुत लिखता भी है तो उसे पढने वाले कम ही होते हैं।

इस पहल में हमारा ये पहला प्रयास है कि ऐसे रचनाकारों को एक मंच प्रदान करें और साहित्य के इन नवांकुरों को उपयुक्त नाम और सम्मान दिया जाए।आप सभी से अनुरोध है कि हमारे इस प्रयास में अपना योगदान दें और अपने दोस्तों को भी हमारे साईट के बारे में ज़रूर बतायें
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September 11, 2019
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