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तत्त्वज्ञान जैसे जटिल एवं गहन विषय पर अधिकारपूर्वक लिखना किसी अनुभवी योगी या तत्त्वज्ञानी के द्वारा ही संभव है. शास्त्रों एवं संतो द्वारा एकस्वर से स्वीकार किया गया है कि मानव जीवन की चरम सार्थकता इसी में है कि वो दृढ़ अभ्यास  के द्वारा तत्त्वज्ञान प्राप्त करके अपने मूल स्वरूप को उपलब्ध हो जाए. योगी श्री आनन्द जी ने प्रस्तुत पुस्तक "तत्वज्ञान" में विषय की बारीकी से विवेचना की है. समाधि और ज्ञान के बारे में ऐसी सूक्ष्म एवं दुर्लभ  जानकारी सहज ही पाठक को मंत्रमुग्ध कर देती है. वास्तव में यह पुस्तक योगी श्री आनन्द जी की विशेषता को भी प्रकट करती है. साधना में थोड़ी उन्नति होने से या सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान से जो लोग तत्वज्ञानी होने के भ्रम में जी रहे हैं उनके लिए यह पुस्तक औषधि की तरह है. कुल मिलाकर यह पुस्तक योगी श्री आनन्द जी के अनुभव-सागर से निकला हुआ ऐसा रत्न है जो दीर्घकाल तक साधकों को साधना पथ पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा. 
योग मार्ग  के अभ्यासी को साधनाकाल में अनेक तरह के अनुभव आते हैं। उनका सटीक विश्लेषण न कर पाने से साधक के भ्रमित होने की सम्भावना बनी रहती है। इस पुस्तक में योगाभ्यास करने की प्रामाणिक विधि के साथ-साथ ध्यानावस्था में आनेवाले अनुभव और उनके अर्थ को सहज, सरल एवं रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। योगी श्री आनन्द जी के अनुभवों का अदभुत संकलन जिसे पढ़कर एक ओर साधक रोमांचित होता है वहीं दूसरी ओर उसे दृढ़ता पूर्वक अभ्यास करने की प्रेरणा मिलती है। जैसे मधुमक्खी अथक परिश्रम करके शहद का संचय करती है उसी तरह से योगी श्री आनन्द जी ने साधकों के कल्याण की प्रबल इच्छा से अपने अनुभवों को एकत्र करने का श्रमसाध्य कार्य किया है। निश्चय ही यह पुस्तक कुण्डलिनी जागरण एवं समाधी के द्वारा अजर, अमर, अविनाशी, नित्य आत्म तत्त्व की ओर साधकों को प्रवृत्त करने में सहायक है.
त्राटक  विषय पर उपलब्ध पुस्तकों में यह पुस्तक अलग महत्त्व रखती है। सामान्य पुस्तकों से इतर इसमें त्राटक के आध्यातिक पहलू की भी विवेचना की गई है। ऐसा देखा गया है कि  सामान्य जनमानस त्राटक के भौतिक लाभ से ही  परिचित होता है। त्राटक के सिद्धहस्त विशेषज्ञ योगी श्री आनन्द जी ने पहली बार त्राटक के कितने ही अनछुए पहलुओं को उजागर किया है। इसमें पूर्वकाल में ऋषि, मुनियों द्वारा त्राटक का प्रयोग, त्राटक-प्रयोग के आधुनिक उदहारण, त्राटक साधना में महारत कैसे हासिल करें, त्राटक से आध्यात्मिक विकास आदि शामिल हैं।  सच  कहा जाए तो त्राटक के विषय में सनातन संस्कृति की दुर्लभ गोपनीय जानकारी  को योगी श्री आनन्द जी ने   करुणावश साधक समुदाय के लिए प्रकट कर दिया है।
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