Gruhasthashramat Kase Vagave ? / Nachiket Prakashan: गृहस्थाश्रमात कसे वागावे?

Nachiket Prakashan
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सध्याच्या काळामध्ये हिंदू संस्कृतीमधील ‘आश्रम-व्यवस्था’ छिन्न विच्छिन्न होत आहे. चारही आश्रमांचा मुख्य आधार असलेल्या गृहस्थाश्रमाची अवस्था तर अत्यंत दयनीय झाली आहे. ‘गृहस्थ’ अनेक प्रकारच्या विळख्यात सापडला असून तो अत्यंत नैराश्यपूर्ण, अशांत आणि तणावयुक्त जीवन जगत आहे. गृहस्थ जीवनातील समस्या त्यांच्या समोर ठेवून त्यावर योग्य तोडगा प्राप्त करून देणारे हे मार्गदर्शनपर पुस्तक आहे.
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Publisher
Nachiket Prakashan
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Published on
Apr 8, 2016
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Pages
118
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Best For
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Language
Marathi
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वेद-पुराण हमारी संस्कृति के संवाहक हैं तथा हमारी समृद्ध धरोहर भी। पुराण एक तरह से इतिहास-ग्रन्थ ही हैं। इनमें विभिन्न महत्त्वपूर्ण घटनाओं, राजाओं-महाराजाओं, ऋषियों-महर्षियों, देवताओं, असुरों आदि की कथाएँ भरी पड़ी हैं। किसी विशेष देवता के नाम पर कोई पुराण है तो उसमें उसी देवता सम्बन्धित कथाओं और अन्तर कथाओं का वर्णन प्राप्त होता है, जैसे शिव पुराण में शिव से सम्बन्धित घटनाओं का उल्लेख मिलेगा तो मार्कण्डेय पुराण में मूलतः देवी की कथा प्राप्त होती है।

ऐसे ग्रन्थ और किसी भाषा या देश में उपलब्ध नहीं हैं। ज्ञान-विज्ञान से पूर्ण इन ग्रन्थों के कारण ही भारत को विश्व-गुरु की उपाधि प्राप्त थी।

अफ़सोस की बात है कि आज हम अपने इन महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों से अपरिचित होते जा रहे हैं। पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से प्रभावित नई पीढ़ी को तो इन उपयोगी तथा बहुमूल्य ग्रन्थों से कोई लेना-देना ही नहीं रहा। यही कारण है कि आज वह पूरी तरह दिग्भ्रमित हो रही है। उच्चतर मानवीय मूल्यों के प्रति उसमें कोई आस्था नहीं रह गई है। बुजुर्गों यहाँ तक कि माता-पिता के प्रति भी उनकी श्रद्धा समाप्त हो गई है। फलतः परिवारों का विखण्डन हो रहा है। परिवार के वृद्ध और वृद्धाएँ वृद्धाश्रमों में रहने को विवश हो रहे हैं। इस पुस्तक के लेखन के मूल में ये सारी समस्याएँ ही हैं। नई पीढ़ी को अपने संस्कार और संस्कृति से परिचित कराना ही इसका उद्देश्य है। उच्चतर जीवन-मूल्यों को समर्पित हैं ये पौराणिक कहानियाँ।

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