ध्यान के माध्यम से स्वयं को तरोताज़ा एवं रोग-मुक्त करें

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इस पुस्तक में दिए गए ज्ञान और अभ्यासों का प्रयोग करने से, आपके शरीर में मौजूद बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं, और आप एक तरोताज़ा, स्वस्थ अवस्था में बने रह सकते हैं। भले ही आपका शरीर रोग-ग्रस्त नहीं है, तब भी आप इस पुस्तक को पढ़ सकते है, ताकि आप यह बेहतर तरीके से समझ पाए की:
•कैसे ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं आपको अपनी सेवाएं प्रदान करती हैं।
•ईश्वर, ब्रह्मांडीय ऊर्जा, आदि से आपका क्या सम्बन्ध है।
यह पुस्तक समझाती है की:
•आप कैसे ईश्वर की ऊर्जा को अवशोषित कर अपने शरीर में मौजूद किसी भी बीमारी का उपचार कर सकते हैं।
•किस तरह से ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को स्वयं को बेहतर तरीके से सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रेरित करें, ताकि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हुए एक बेहतर एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर पाएं।
•ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं पर सकारात्मक प्रभाव के माध्यम से आप किस तर
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About the author

1970 के दशक से लेखिका ध्यान का अभ्यास कर रही है। 1994 में उनका ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान से परिचय हुआ, और तभी से वह एक बीके (वह जो ब्रह्मा कुमारियों के ज्ञान का उपयोग करते है) बन गयी। एक बीके बनने के बाद, लेखिका लगातार ईश्वर की ऊर्जा का इस्तेमाल ताज़ा महसूस करने के लिए, खुद का उपचार करने के लिए, शुद्ध होने तथा स्वर्ण युग में जाने के लिए कर रही हैं। इस पुस्तक के माध्यम से, लेखिका अपने द्वारा अर्जित किये हुए ज्ञान और अनुभवों से लोगो का मार्गदर्शन कर रही है, कि किस तरह खुद को और दूसरों को तरोताज़ा, शुद्ध, एवं रोग-मुक्त रखा जाए।
1996 से, लेखिका इन विषयों पर लेख और पुस्तकें लिख रही हैं:
•होलोग्राफिक यूनिवर्स।
•लेखिका के विभिन्न आध्यात्मिक अनुभव।
•वह ब्रह्मांडीय उर्जा जो विश्व के साथ साथ स्वर्ण-युग को भी प्रदान करती हैं।
•विभिन्न प्राचीन ग्रंथ एवं मिथक।
•ब्रह

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Additional Information

Publisher
Babelcube Inc.
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Published on
Nov 25, 2017
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Pages
84
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ISBN
9781507197981
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Language
Hindi
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Genres
Body, Mind & Spirit / Healing / General
Health & Fitness / Healing
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 कहते हैं न की जा की रही भावना जैसी प्रभु मूर्ति तीन देखि तैसी। यह बात धर्म की दृष्टि से तो हम अनेको बार सुनते आये हैं परन्तु हममे से विरले होंगे जिन्हे यह भी बोध होगा की इस सिद्धांत आद्योपांत प्रभाव हमारे मन , बुद्धि और शरीर के स्वस्थ्य से सम्बंधित है।  इस सिद्धांत के दुरुपयोग से हम अनेको प्रकार के रोगों को अपनी और आमंत्रित भी कर सकते हैं और इसीके अनुपालन के द्वारा हम अनेकों प्रकार के रोगो से सर्वथा मुक्ति भी पा सकते हैं। 


कुछ वर्ष पूर्व तक तो ऊपर लिखे गए वाकय केवल धार्मिक दृष्टि पर ही जाने जाते थे परन्तु आज वर्तमान में इतने बड़े स्तर पर वैज्ञानिक शोध सामने आ चुके हैं की आश्चर्य होने लगता है की यह सूत्र हमारे स्वस्थ्य को सुधरने और बिगाड़ने में कितना बड़ा महत्व रखता है। आप इस पुस्तक के विचारों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएंगे और साथ ही अपने भीतर वह वांछित परिवर्तन भी अवश्य लाना चाहेंगे जिससे आपका जीवन अधिक स्वस्थ , सरस और आनंद पूरित हो जाए।  दिनेश कुमार 

 न जाने जीवन भर कितनी बड़ी मात्रा में भय रह रह कर और आ आ कर हमे अस्त व्यस्त एवं त्रस्त कर डालता है। इस भय को आने के लिए कोई अनुमति नहीं लेनी पड़ती और यह हमारे सबसे गहरे स्तरों पर घुस कर ऐसी घुस पैठ करने लगता है की प्रतीत  हो जाता है की अब  किसी काम के नहीं रहे।  दिमाग की स्थिरता इसके दुष्प्रभाव से हवा हो जाती है , स्मृतियाँ खोने लगती हैं , निर्णय लेना असंभव सा प्रतीत होने लगता है। अच्छा खासा व्यक्ति धेले का नहीं बचता है। 


और जिनके  भीतर  इस भय के बहुत ने लम्बे समय तक डेरा जमाया हो उन्हें तो डिप्रेशन जैसे उन्माद नकारात्मकता का साम्राज्य लिए हुए बक्शते ही नहीं हैं।   सोचने की बात यहाँ पर यह है की क्या इससे कोई बचने का मार्ग है , क्या इसके नाग पाश से अपने आप को छुड़ाया जा सकता है। 

देखो भाई सत्य तो यह है अँधेरे में झाड़ी भी बहुत का ही प्रभाव  डालती है और उसी प्रकार यह भय का भूत उससे कहीं अधिक गहराई पर पहुँच कर हमे छिन्न भिन्न कर जाता है। इस पुस्तक के कुछ पृष्ठ तुम्हे उस सत्य से अवगत करवाएंगे जिन्हे जान कर और मान कर तुम भविष्य में अकारण भय का शिकार नहीं बनोगे।  सार्थक खतरों से भयभीत होना तो समझ में आता है परन्तु निरर्थक कारणों से तार तार हुए चले जाना बिलकुल भी समझ में नहीं आता है।  आओ चलो अब इस पुस्तक पर अपना ध्यान लगाओ।  दिनेश कुमार 

दूध, घी, दही का प्रयोग मानव सभ्यता के शुरुआत से होता आ रहा है । दूध अनमोल गुणी का खजाना है । दूध से ही दही, घी पदार्थ तैयार किए जाते हैं और इनसे खाने के अनगिनत पदार्थ बनाए जा सकते है । इस पुस्तक में दूध, घी, दही का प्रयोग दवाई के रूप में रोगों के इलाज के लिए किया गया है । आधुनिक वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार दूध सर्वोत्तम पेय पदार्थ है जिसे संपूर्ण खाद्य माना जाता है । इसमें 85 प्रतिशत प्रोटीन होता है । घी वस्तुतः दूध में निहित बसा और विटामिनों का मिश्रण है । दही शरीर में बसा बढ़ाने और पेट के लिए फायदेमंद होता है । मीठा तथा ताजा दही मन में ताजगी, उल्लास, प्रफुल्लता, पास तथा स्वाभाविक भूख आदि जगाता है ।
प्राकृतिक जीवन संजीवनी

प्रस्तुत पुस्तक में स्वस्थ जीवन के तीन वरदानों को एफ. टी. त्रिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिनकी उपयोगिता और स्वाभाविकता को संक्षिप्त में जानें और अपनाएँ प्राकृतिक जीवन संजीवनी।

यु.एफ.टी.(युरिन फास्ट थेरेपी) : शिवाम्बु उपचार पध्दति सदियों पुरानी है। अपने शारीरिक स्वास्थ के प्रति सजक होने के बाद से इंसान ने जिन विविध उपचारों की खोज की, उनमें से एक शिवाम्बु (यु.एफ.टी.) उपचार पध्दति भी है। इसमें रोग के लक्षण के अनुसार इलाज नही किया जाता बल्कि रोग के कारणों को दुरूस्त किया जाता है। इसलिए इसमें रोग के नामकरण को ज्यादा महत्व नही दिया जाता।

बी.एफ.टी. (बॅच फ्लॉवर थेरेपी) : कारण को हटा देने से रोग अपने आप हट जाते है। कारण हैं मन के सूक्ष्म विकार और कारण मिटाने में मदद करती है बी.एफ.टी.। जैसे अच्छे कर्मों का फल आनंद देता है, वैसे ही 38 फूलों का फल मानसिक स्वास्थ्य देता है। मानवीय स्वभाव के सारे दोषों तथा उनसे प्रकट होनेवाली तकलीफों के लिए बी.एफ.टी. उपचार का काम करता है। इसे सभा उम‘ के लोग ले सकते है।

ई.एफ.टी. (इमोशनल फि‘डम टेक्नीक) : भावना मुक्ति तकनीक यह एक तरह से मानसिक एक्युपंचर तकनीक है, जो शरीर में स्थित ऊर्जा रेखाओें (energy meridians) पर आधारित है। ई.एफ.टी. में शरीर के कुछ बिंदुओं पर हल्के हाथों से थपथपाकर असंतुलित ऊर्जा को संतुलित किया जाता है। यह एक बहुत ही आसान तरीका है और इसके परिणाम बडे प्रभावकारी और तुरंत दिखाई देनेवाले होते है।
‘स्वास्थ्य के लिए विचार नियम’ कोई साधारण पुस्तक नहीं है| इस पुस्तक में दिए गए सूत्र साफ, सरल और बेहद शक्तिशाली हैं| वे संपूर्ण स्वास्थ्य दिलाने में, हर बीमारी और वेदना से मुक्त कराने में आपकी शत-प्रतिशत मदद करेंगे| इस पुस्तक में पढ़ें-

* स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए विचार नियम अनुसार विचारों में कौन से और कैसे परिवर्तन लाने चाहिए?
* दर्द और बीमारी का मानसिक स्तर पर होनेवाला असर कैसे कम करें?
* नकारात्मक भावनाओं से मुक्त होकर स्वास्थ्य कैसे पाएँ?
* स्वास्थ्य के लिए कैसे पाएँ ‘पॉवर ऑफ फोकस’?
* रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कौन से स्वास्थ्य टिप्स अपनाए जाएँ?
* शरीर के हर अंग से क्षमा मांगकर परम स्वास्थ्य की ओर कैसे बढ़ें?
* स्वीकार, स्वसंवाद और धन्यवाद से हर बीमारी से मुक्ति कैसे पाएँ?

अगर आप स्वास्थ्य की दौलत पाकर अमीर बनना चाहते हैं तो यह दवा पीना (पुस्तक पढ़ना) शुरू करें|
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