सबसे रोचक विषय है की सही समय स्थान की जानकारी ना होते हुए भी पुस्तक की सहायत से लग्न कुन्डली सरलता से बनाई जा सकती है
जातक कहा कब किन परिस्थती मे जन्म लेगा एवं मृत्यू को प्राप्त करेगा जीवन मे क्या उतार चढ़ाव होगे पुस्तक का गहन अध्यन कर सरलता से जाना जा सकता है
यह पुस्तक हस्तरेखा ज्योतिष एवं कुन्ली का गूढ़ रहस्य बताने वाली अनमोल ग्यान का खजाना है
लेखक - हस्तरेखा ज्योतिष में डॉक्टर ऑफ फिलॉसिफी एवं ज्योतिष शिरोमणि कीउपाधि से विभूषित एवं अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलनों मे सम्मानित किये गये है लेखक का जन्म मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में पन्ना जिला में कायस्थ शिरोमणि महात्मा भिखारी दास (सत्रहवीं शताब्दी में ) जो की महामति प्राणनाथ जी के शिष्य एवं महाराजा क्षत्रशाल के सेना नायक थे जिन्होने महाराजा छत्रशाल के लिये लोहागढ़ का किला जीता था उनकी 15वीं पीढी में श्री बुद्ध सिंह खरे के बड़े पुत्र श्री उमाशंकर खरे जी एवं माता सुकुमारी के यहां 7 मई 1968 को हुआ
लेखक वर्तमान में मध्य प्रदेश के सतना जिले में सिल्वर स्टार फाइनेंस एंड लीजिंग लिमिटेड कंपनी में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं और इनके ज्योतिषीय लेख स्थानीय समाचार पत्र स्टार एस्ट्रो में प्रकाशित होते हैं जो पाठकों के द्वारा बहुत पसंद किये जाते हैं.