Nirmaan-4/निर्माण-4: Children's Magazine/बच्चों की पत्रिका

 1979 में, आजसे 38 साल पहले, सोचा भी नहीं था कि किसी दिन ऐसी तक़नीक़ आएगी कि कभी सिर्फ़ एक प्रति में छपनेवाली एक पत्रिका दुनिया-भर में पढ़वाई जा सकेगी! इस पत्रिका को छापने की उधेड़-बुन में अचानक एक दिन यह भी याद आया कि ऐसे काम मैंने कई बार किए हैं कि बिना इस बात की चिंता/परवाह किए कि मुझसे पहले यह काम किसीने किया है कि नहीं, मैं अपनी ओर से शुरु कर देता हूं। फिर चाहे वह छोटे-से क़स्बे में बिना कुछ जाने-सीखे, सिर्फ़ क्रिएटिव-कल्पना-सामर्थ्य के चलते, फ़ैशन-डिज़ाइनिंग शुरु कर देना हो, कलात्मक विज़िटिंग कार्डस बनाना शुरु करना हो या बैंक में प्रोबेशनरी ऑफ़िसर की लिखित परीक्षा पास कर लेने के बावज़ूद दर्ज़ी की दुकान खोल लेना हो, सामुदायिक ब्लॉग ‘नास्तिकों का ब्लॉग’ के शुरु होने के बाद बाक़ी सदस्यों की लगभग 10 दिन तक छाई चुप्पी तोड़ते हुए पहली पोस्ट, एक नई स्थापना, नये विचार के साथ लिख देना हो या लोगों की चेतावनियों/धमकीनुमांओं के बावज़ूद फ़ेसबुक पर 

नास्तिकTheAtheist ( https://www.facebook.com/groups/589510514401889/ )  ग्रुप 

और 

गूगल-ब्लॉग ( https://nastiktheatheist.blogspot.in/ ) शुरु कर देना हो......


‘बच्चों के नवनिर्माण का मासिक ‘निर्माण’ नामक यह हस्तलिखित पत्रिका शुरु करते समय भी मुझे नहीं मालुम था कि इससे पहले ऐसा किसीने किया है या नहीं....


बहुत सारे लोगों का सहयोग और मेहनत इसमें लगे हैं, इसलिए सोचा कि इसे मुफ़्त ही बेचा जाए....


*निर्माण के संदर्भ में कुछ मज़ेदार बातें*


1. कुछ बचपना भी था- निर्माण शीर्षक भारत सरकार द्वारा रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है..... इसीका नतीजा है।

2. ‘निर्माण’ की चूंकि एक ही प्रति छपती/लिखी जाती थी इसलिए मित्र-परिचित-रिश्तेदार-सहेलियां-मोहल्लेवाले सब बारी-बारी से (मुफ्त में) इसे पढ़ने के लिए ले जाते थे। इसके बावजूद पत्रिका की भौतिक स्थिति अभी भी ठीक-ठाक है।

3. जैसे-जैसे याद आएंगी, अन्य रोचक जानकारियां आपको देता रहूंगा।


तब तक आप आराम से पढ़िए....


-संजय ग्रोवर

24-05-2017

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About the author

 ʘ SANJAY GROVER संजय ग्रोवर :

ʘ सक्रिय ब्लॉगर व स्वतंत्र लेखक.

ʘ Active Blogger and Freelance Writer.

ʘ मौलिक और तार्किक चिंतन में रुचि.

ʘ Inclined toward original and logical thinking.

ʘ नये विषयों, नये विचारों और नये तर्कों के साथ लेखन.

ʘ loves writing on new subjects with new ideas and new arguments.

ʘ फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी सक्रिय.

ʘ Also active on Facebook and Twitter.

ʘ पत्र-पत्रिकाओं में कई व्यंग्य, कविताएं, ग़ज़लें, नारीमुक्ति पर लेख आदि प्रकाशित.

ʘ Several satires, poems, ghazals and articles on women's lib published in various journals.

ʘ बाक़ी इन लेखों/व्यंग्यों/ग़जलों/कविताओं/कृतियों के ज़रिए जानें :-)

ʘ Rest.. learn by these articles/satires/ghazals/poems/creations/designs :-)

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4.2
5 total
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Additional Information

Publisher
Sanjay Grover
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Published on
May 24, 2017
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Pages
50
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Language
Hindi
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Genres
Comics & Graphic Novels / Manga / Children's Books & Fairy Tales
Family & Relationships / Parenting / Parent & Adult Child
Psychology / Psychotherapy / Child & Adolescent
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