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Prabhat Prakashan
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सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यानपद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद वे अंतिम सत्य से दूर रहे।

उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य पर भी विराम लगाया, ताकि वे अपना अधिकसेअधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है, वह है—समझ (अंडरस्टैंडिंग)।

सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलगअलग प्रकार से होती है, लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सबकुछ है और यह ‘समझ’ अपने आप में पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।

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About the author

सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद वे अंतिम सत्य से दूर रहे। उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया, ताकि वे अपना अधिक-से-अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी, जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्म-साक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है, वह है—समझ (अंडरस्टैंडिंग)। सरश्री कहते हैं, ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है, लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आप में पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान-प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’ सरश्री ने दो हजार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सत्तर से अधिक पुस्तकों की रचना की है। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनूदित हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं।
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Additional Information

Publisher
Prabhat Prakashan
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Published on
Jan 1, 2015
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Pages
200
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ISBN
9789351864912
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Best For
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Language
Hindi
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Genres
Self-Help / Dreams
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Content Protection
This content is DRM protected.
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नींव नाइन्टी + टॉप टेन + छिपा शून्य = १००% आदर्श जीवन

एक ‘सुखी, सफल और आदर्श जीवन’ जीना ऐसा सपना है जिसे आप आज के समय में भी हकीकत में बदल सकते हैं, बस जरुरत है कुदरत के अटल विचार – नियमों को जानकार उसे जीवन में उतारने की। यह पुस्तक आपको यही कला सिखाती है। इसे पढ़कर आप जानेंगे –

* विचार नियमों को अपनाकर सफलता के लिए जरुरी आदर्श गुणों (विश्वसनीयता, मैच्युरिटी, निरंतरता इत्यादि) का विकास कैसे करें?
* अपने विकास के लिए सही संघ का चुनाव क्यों और कैसे करें?
* आपके जीवन में टॉप तेन (बाहरी पर्सनैलिटी) की असली भूमिका क्या है, इसका सही लाभ कैसे लें?
* आपके अंदर छिपा वह ‘शून्य’ क्या है जिसे अनुभव से जानने के बाद आप अपने जीवन का उच्चतम लक्ष्य पा सकते हैं?

आइए, इन रहस्यों को जानकार अपने जीवन को ‘सुखी, सफल, आदर्श जीवन’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।
 जिस निद्रा को सामान्य जन केवल एक निष्क्रियता का अंतराल मानते हैं योगी जन उसी काल को मनुष्य के निर्माण की  वास्तविक प्रयोगशाला के रूप में जानते हैं. ध्यान से विचार करें कि  आप निद्रा में होते हैं तब केवल आपका शरीर बहरी स्तरों पर हिल नहीं रहा होता।  आप मात्र करवट बदलते हैं।  परन्तु भीतर आपके शरीर के समूचे अंग अवयव पूरी सक्रियता से कार्यरत होते है।  आगरा आपके भीतरी अंग कार्य नहीं कर रहे हों तो आप जीवित ही नहीं बचेंगे।  अगर ह्रदय कार्य न करे , आंते कार्य न करे तो क्या होगा; सोचिये। 

 इतना ही नहीं बल्कि आपका  मस्तिष्क भी कार्यरत होता है।  आप के भीतर विचार भी चलते रहते हैं , कल्पनायें स्वप्नों के माध्यम से चलती रहती हैं।  कुल मिला के कहा जाये तो आप केवल अपनी टांगो के द्वारा निष्क्रिय रहते हैं परन्तु आपका बाकी का समूचा अस्तित्व भली प्रकार से भागम भाग करता ही रहता है।    अगर उस काल को हम प्रयोग करले और किसी विशेष युक्ति -विधि के द्वारा उपयोग करलें तो हमारे जीवन में आश्चर्यजनक स्तर के परिवर्तन लाये जा सकते हैं। 

हम अनेको आदतों को बदल सकेंगे , वहीँ अनेको नई आदतों को अपना सकेंगे।  गहरी स्तरों पर हम नए विचारों को अपनी ओर आकर्षित कर पाएंगे। अपने पुरे अस्तित्व को शांत कर पाएंगे।  अनेको प्रकार के रोगो को स्वस्थ करने में सशक्त भूमिका का निर्वाह कर पाएंगे।  अपने विषय में अनेको अनजाने सत्य  पाएंगे।  इतना ही नहीं बल्कि इससे से भी  कहीं अधिक गहरे स्तरों पर सक्रियता से कार्य करते हुए हम अनेको प्रकार के लाभ प्राप्त कर पाएंगे। 

विशेषतः वह लाभ जो हम सामान्यतः हम जागृत अवस्था में प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इस महत्वपूर्ण ज्ञान से अपरिचित रहना अधूरे जीवन को जीने के समान है। दिनेश कुमार 

प्रेम नियम – प्लास्टिक प्रेम से मुक्ति

आज के युग में जहाँ, जितनी रफ़्तार से प्रेम आता है, उससे भी अधिक तेज़ी से चला जाता है, इसलिए ज़रूरत है सच्चे प्रेम की और प्रेम नियम के ज्ञान की I

आप यह नियम पढ़कर स्वयं में भरपूर प्रेम का संचार महसूस करेंगे I फिर आपको किसी और से प्रेम माँगने के लिए मिन्नतें करने की ज़रूरत नहीं होगी I प्रेम नियम आपको आत्मनिर्भर जो बनाएगा I

सच्चा प्रेम हमारे पास भरपूर होने के बावजूद भी हम क्यों उसके लिए तरसते हैं? वह अलग – अलग भेस में हमारे सामने आता है मगर हम क्यों अपने तरीके से प्रेम लेने की चाहत अकसर हमें प्रेम से वंचित रखती है I इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए प्रेम नियम के ज्ञान से सीखें –

१. ऐसे कौन से लोग हैं जो आपके प्रेम के लिए रो रहे हैं ?
२. प्रेम कब फुर्र हो जाता है?
३. आपका प्रेम किस फ्रेम में अटका हुआ है?
४. प्लास्टिक (नकली) प्रेम से आज़ादी कैसे मिले?
५. प्रेम पतन के तीन बड़े कारण कौन से हैं ?
६. दूसरों की परवाह कब, क्यों और कैसे करें?
७. क्या प्रेम में मोह, वासना और ईर्ष्या ज़रूरी है?
८. नफरत से मुक्ति कैसे मिले ?
९. क्षमा की शक्ति का उपयोग कैसे करें?
१०. ईश्वरीय प्रेम और प्रेम समाधि की पराकाष्ठा क्या है?

आपके जीवन में प्रेम नियम के आगमन से ही नकारात्मक भावनाओं का, जो रिश्ते टूटने का कारण हैं, विसर्जन होना शुरू होगा I इसलिए आइए, सच्चे प्रेमी बनकर सच्चे प्रेम की रह पर चलें… प्रेम, आनंद, मौन की बाँसुरी की ही तरह खाली होकर बजें I
 निराशा की ओर से आशा के प्रति समर्पण'यदि आप इस वर्ष केवल एक ही पुस्तक पढ़ना चाहते हों, तो निश्चित तौर पर वह पुस्तक डॉक्टर फ्रैंकल की ही होनी चाहिए।'
-लॉस एंजेलिस टाइम्स

मैंस सर्च फ़ॉर मीनिंग, होलोकास्ट से निकली एक अद्भुत व उल्लेखनीय क्लासिक पुस्तक है। यह विक्टर ई. फ्रैंकल के उस संघर्ष को दर्शाती है, जो उन्होंने ऑश्विज़ तथा अन्य नाज़ी शिविरों मे जीवित रहने के लिए किया। आज आशा को दी गई यह उल्लेखनीय श्रद्धांजलि हमें हमारे जीवन का महान अर्थ व उद्देष्य पाने के लिए एक मार्ग प्रदान करती है। विक्टर ई. फ्रैंकल बीसवीं सदी के नैतिक नायकों में से हैं। मानवीय सोच, गरिमा तथा अर्थ की तलाश से जुड़े उनके निरीक्षण गहन रूप से मानवता से परिपूर्ण हैं और उनमें जीवन को रूपांतिरत करने की अद्भुत क्षमता है।

-प्रमुख रब्बी, डॉक्टर जोनाथन सेक
विचारों की दंगल से आज़ादी कैसे मिले


आज मनोरंजन के इतने साधन उपलब्ध हैं कि हर इंसान उनके पीछे भागता रहता है। अगर उसे मनोरंजन नहीं मिला तो वह छटपटा जाता है। यहाँ तक कि आज के बच्चे भी मोबाईल नहीं मिला तो चिढ़चिढ़ करते हैं। ऐसे वातावरण में मन को शांति कैसे मिले? और विचारों की दंगल कैसे खत्म हो?


इस पृष्ठभूमि के आधार पर काल्पनिक कहानी के रूप में प्रस्तुत किए गए इस पुस्तक में आपको आतंरिक शोर से शांति प्राप्त करने का ज़रिया मिलेगा। इसके अलावा इस पुस्तक में पढ़ें ः

* जीवन में विचारों का क्या महत्त्व है?

* मन आपका अच्छा मित्र कैसे बन सकता है?

* मन के शोर का मूल कारण क्या है?

* आंतरिक शोर से मुक्ति पाने के स्थाई उपाय कौन से हैं?

* विचारों के शोर से मुक्ति पाने के लिए ध्यान का उपयोग कैसे करें?

* खुली आँखों से ध्यान कैसे करें?


यह पुस्तक पढ़ने के बाद कहानी के नायक के साथ आप भी जीवन के सबसे मुख्य और मूल सवाल की तरफ बढ़ पाएँगे। आइए, आज की भाषा में लिखी गई इस कहानी के नायक की तरह हम सभी इस पुस्तक के साथ मनन करें और पाएँ उस अवस्था का स्वाद, जिसे पाने हम पृथ्वी पर आए हैं।

 

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