Vichar Niyam: ...Power of Happy Thoughts

WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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इंसान का मन विचार निर्माण करने की फैक्टरी है जिससे बिना रुके विचार प्रकट हो रहे रहे हैं। अनचाहे, जमा हो चुके विचारों की वजह से तनाव और दुःख का निर्माण होता है। क्या इन विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है... कोई दिशा दी जा सकती है... या इन्हें रोका जा सकता है... क्या इन विचारों का निर्माण लाभ देनेवाले, सकारात्मक रूप से हो सकता है। इस पुस्तक में सरश्रीजी विचारों के नियमों को समझाते हैं। विचारों को कैसे नियंत्रित किया जाए तथा दिशाहीन विचारों को कैसे उपयुक्त दिशा देकर उनसे कार्य करवाया जाए।
  • विचार नियम क्या है?
  • क्या यह संभाव है विचार नियम के इस्तेमाल से इंसान के द्वारा कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है?
  • क्या यह संभव है कि दो परस्पर विरोधी विचारों के परिणाम वास्तविक जीवन में देखने को मिलते हैं?
  • हमारे जीवन को विचार नियम कब, क्यों और कैसे प्रभावित करते हैं?
  • मन को पुराने नकारात्मक विचारों से मुक्ति कैसे मिले?
  • यह कैसे पता चले कि कोई घटना दिव्य योजना के अनुसार हो रही है या नहीं?
  • हमारे अवचेतन मन की प्रोगामिंग कब और कैसे होती है तथा क्या उस प्रोग्रामिंग को बदला जा सकता है?
  • विचारों के ध्यान के लिए कौनसी मूल बातें हैं?
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About the author

Sirshree’s spiritual quest, which began right from his childhood, led him on a journey through various schools of thought and meditation practices. The overpowering desire to attain the truth made him relinquish his teaching job. After a long period of contemplation, his spiritual quest ended with the attainment of the ultimate truth. Sirshree says, “All paths that lead to the truth begin differently, but end in the same way—with understanding. Understanding is the whole thing. Listening to this understanding is enough to attain the truth. This understanding begins with the mantra of acceptance. The mantra of acceptance is: Can I accept this?”

To disseminate this understanding, Sirshree devised Tejgyan—a unique system for wisdom—that helps one to progress from self-help to self-realization. He has delivered more than 1500 discourses and written over 60 books. His books have been translated in more than ten languages and published by leading publishers such as Penguin Books, Hay House Publishers, Jaico Books, etc. Sirshree’s retreats have transformed the lives of thousands of people and his teachings have inspired various social initiatives for raising global consciousness.
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Reviews

4.7
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Additional Information

Publisher
WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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Published on
Nov 14, 2011
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Pages
232
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ISBN
9788192599007
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Language
Hindi
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Genres
Self-Help / Motivational & Inspirational
Self-Help / Personal Growth / Success
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Content Protection
This content is DRM protected.
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Available on Android devices
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Sirshree
 दो जादूई शक्तियाँ

‘विचार नियम’... सरश्री के अनमोल कलम से आविष्कृत हुआ अनुपम पुस्तक! लाखों लोगों के जीवन में क्रांति लानेवाला ग्रंथ| इस पुस्तिका में संक्षिप्त में दिए गए सात विचार सूत्र और क्षमा साधना के सात कदम आपको सच्ची सफलता के शिखर पर पहुँचाएँगे|

आज ‘विचार नियम’ पुस्तक का लाभ लेनेवाला हर इंसान प्रेम, आनंद, शांति, समृद्धि और संतुष्टि का वरदान प्राप्त कर रहा है| ‘विचार नियम’ इस विषय के साथ उतना ही दूसरा महत्वपूर्ण विषय यानी सभी बंधनों से मुक्त करनेवाली ‘क्षमा साधना’| इन दोनों विषयों के लगभग सभी पहलू सरश्री ने अनेक प्रवचनों के माध्यम से प्रकाशित किए हैं| प्रस्तुत पुस्तिका इन दो विषयों के विस्तार का सार है|

लक्ष्य चाहे सफल सांसारिक जीवन जीना हो या मोक्ष प्राप्ति, विचारों का विज्ञान जाने बिना इंसान कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता और क्षमा साधना के बिना दुःखदायी भावनाओं से मुक्त नहीं हो सकता| अतः जिसे सर्वोच्च आनंद चाहिए, उसके पास हमेशा यह पुस्तिका होनी चाहिए| तो क्या आप जीवन के सभी स्तरों पर विचार नियम और क्षमा का जादू देखने के लिए तैयार हैं? यदि ‘​हाँ’ तो पुस्तिका के अंदर पढ़ें - सुखी जीवन के सात कदम|

Sirshree
शरीर के लिए तम (आलस्य) आवश्यक है मगर इसकी अधिकता इंसान की अभिव्यक्ति में बाधा बन जाती है।

आलस्य एक ऐसा विकार है, जो इंसान की बाकी सभी खूबियों पर भारी पड़ जाता है। इसके दुष्प्रभाव में आकर एक अच्छे से अच्छा कलाकार, रचनाकार, काबिल इंसान भी जीवनभर असफलता का मुँह देखता है।

इस पुस्तक के द्वारा आपको अपने ही भीतर छिपकर बैठे बड़े दुश्मन के बारे में चेताया जा रहा है। इसे पहचानें और अपने भीतर से खोज कर, इसे बाहर निकाल फेंकें। इस बड़े कार्य को करने के लिए यह पुस्तक 7 संकेतों, 7 कदमों, 7 दिशाओं और 13 उपायों द्वारा आपका हर तरह से मार्गदर्शन करेगी।

तो आइए, इस पुस्तक रूपी हथियार की मदद से आलस्य को दूर भगाएँ और इस कार्य में सुस्ती बिलकुल न करें।
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‘स्वास्थ्य के लिए विचार नियम’ कोई साधारण पुस्तक नहीं है| इस पुस्तक में दिए गए सूत्र साफ, सरल और बेहद शक्तिशाली हैं| वे संपूर्ण स्वास्थ्य दिलाने में, हर बीमारी और वेदना से मुक्त कराने में आपकी शत-प्रतिशत मदद करेंगे| इस पुस्तक में पढ़ें-

* स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए विचार नियम अनुसार विचारों में कौन से और कैसे परिवर्तन लाने चाहिए?
* दर्द और बीमारी का मानसिक स्तर पर होनेवाला असर कैसे कम करें?
* नकारात्मक भावनाओं से मुक्त होकर स्वास्थ्य कैसे पाएँ?
* स्वास्थ्य के लिए कैसे पाएँ ‘पॉवर ऑफ फोकस’?
* रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कौन से स्वास्थ्य टिप्स अपनाए जाएँ?
* शरीर के हर अंग से क्षमा मांगकर परम स्वास्थ्य की ओर कैसे बढ़ें?
* स्वीकार, स्वसंवाद और धन्यवाद से हर बीमारी से मुक्ति कैसे पाएँ?

अगर आप स्वास्थ्य की दौलत पाकर अमीर बनना चाहते हैं तो यह दवा पीना (पुस्तक पढ़ना) शुरू करें|
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कभी-कभी हमारे मन में यह जिज्ञासा आती है कि मैं कौन हूँ, ईश्वर कौन है, मैं कौन नहीं हूँ इत्यादि। जब ऐसी जिज्ञासाओं का कोई हल नहीं मिलता, तो हमारे अंदर संशय और बेचैनी पैदा हो जाती है जिसका परिणाम यह होता है कि हमारा जीवन नकारात्मक विचारों के दुष्परिणामों से प्रभावित होता रहता है तथा हमारा चेतन विश्वास तथा अज्ञानता के भॅंवर में गोते लगाता रहता है। यह पुस्तक हमारी इन्हीं जिज्ञासाओं को शांत करती है। इस पुस्तक के माध्यम से हम "अपनी पूछताछ' का मार्ग तलाश सकते हैं और अपने मनोशरीरयंत्र की पूछताछ ईमानदारी के साथ करते हुए "समझ' की मंजिल पा सकते हैं। पुस्तक मूलतः 6 खण्डों में विभाजित है, जिसके प्रथम खण्ड में "मशहूर मंत्र' यानी "अपने होने के एहसास' की कला समझाई गई है। अन्य खण्डों में "ईश्वर कौन', "मैं कौन नहीं' "मनोशरीर यंत्र कौन', "मैं कौन' और अन्त में "गुमनाम मंत्र' के द्वारा हम अपनी पूछताछ की संपूर्ण विधि जानकर अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। पुस्तक में प्रख्यात तेजगुरु सरश्री द्वारा शिष्यों द्वारा पूछे गए जिज्ञासा मूलक सवालों के सरल जवाब दिए गए हैं। ये सभी समाधान विषय की जटिलता को कम करके हमें स्व अनुभव की गहराइयों तक ले जानेवाले हैं। पुस्तक सरल भाषा और रोचक प्रसंगों द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसका पाठकों पर अमिट प्रभाव पड़ता है।
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 सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यानपद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद वे अंतिम सत्य से दूर रहे।

उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य पर भी विराम लगाया, ताकि वे अपना अधिकसेअधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है, वह है—समझ (अंडरस्टैंडिंग)।

सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलगअलग प्रकार से होती है, लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सबकुछ है और यह ‘समझ’ अपने आप में पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।

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