स्वामी विवेकानन्द सत्यद्रष्टा ऋषि थे। वे युगावतार भगवान् श्रीरामकृष्ण के अन्तरंग लीलासहचर एवं उनके युगधर्म-संस्थापन-कार्य में प्रमुख सहायक थे। उन्होंने सनातन वैदिक धर्म को पुनरुज्जीवित किया तथा समस्त विश्व में उसका प्रसार करते हुए सर्वत्र चैतन्य भर दिया। आध्यात्मिक आलोक से परिपूर्ण उनका लोकोत्तर जीवन अत्यन्त स्फूर्तिदायी है। उनके तेजस्वी विचारों में हमारे देशवासियों में संजीवन का संचार करने की सामर्थ्य निहित है। आज हमारे राष्ट्रीय जीवन की ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका हल हमें उनकी शिक्षाओं में न मिल जाता हो। स्वामीजी के प्रेरणादायी जीवन एवं विचारों का जितना प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही हमारे राष्ट्र का कल्याण होगा। इसी उद्देश्य से उनकी यह संक्षिप्त जीवनी प्रकाशित की गई हैं।