कहना न होगा, इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक का हिन्दी संस्करण प्रकाशित होना अत्यन्त आवश्यक था। वैसे, ‘पत्रावली’ को छोड़कर लगभग शेष सभी भागों का अनुवाद कुछ वर्ष पूर्व, श्रीरामकृष्ण मिशन विवेकानन्द आश्रम, रायपुर से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘विवेक-ज्योति’ में धारावाहिक रूप से आ चुका है। प्रभु की असीम कृपा से अब सम्पूर्ण पुस्तक का हिन्दी अनुवाद प्रकाशित हो जाने से हिन्दीभाषी पाठकों का एक बड़ा अभाव दूर हुआ।