वह जिस तरह रहता है और कहता है, वही कर सकता है।-नीलांजनि मलिक, फ़ेमिनिस्ट रायटर
उसका व्यंग्य मारक है, वह शिल्प और शैली बदल-बदलकर लिखता है, उसने क़िताबें पढ़ना छोड़ दिया उसके बाद अपनी सबसे अच्छी क़िताबें लिखी। -ओमकुमार चंडीवाल, दलित विचारक
मेरी सारी कृतियां ले लो, संजय, बदले में बस अपनी यह एक क़िताब मेरे नाम कर दो!-रति सर्वगोत्रिय, अभिनेत्री
अकेले टूटे-फूटे घर में राजा की तरह रहना, उसपर इतने लांछन सहना, तिसपर इतना साहस और संयम से कहना-मैं तो कहूंगा कि अभिव्यक्ति के मैदान में वह वनमैन आर्मी है जो तर्क की गोलियों से बड़े-बड़े षड्यंत्रो और प्रपंचों को ढेर कर देता है।-रेशम बटुक, लोक कलाकार
(ये सब मैंने ख़ुद ही लिख लिया है। दोस्तों से लिखवाता तो वे और भी बढ़ा-चढ़ाकर लिखते।
इसे भाड़ में जाने दीजिए। सैम्पल देखिए, अच्छा लगे तो क़िताब ख़रीदिए)
(संजय ग्रोवर की क़िताबें-अच्छी क़िताबें, सस्ती क़िताबें)
ABOUT the AUTHER लेखक के बारे में
ʘ SANJAY GROVER संजय ग्रोवर :
ʘ सक्रिय ब्लॉगर व स्वतंत्र लेखक.
ʘ Active Blogger and Freelance Writer.
ʘ मौलिक और तार्किक चिंतन में रुचि.
ʘ Inclined towards original and logical thinking.
ʘ नये विषयों, नये विचारों और नये तर्कों के साथ लेखन.
ʘ loves writing on new subjects with new ideas and new arguments.
ʘ फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी सक्रिय.
ʘ Also active on Facebook and Twitter.
ʘ पत्र-पत्रिकाओं में कई व्यंग्य, कविताएं, ग़ज़लें, नारीमुक्ति पर लेख आदि प्रकाशित.
ʘ Several satires, poems, ghazals and articles on women's lib published in various journals.
ʘ बाक़ी इन लेखों/व्यंग्यों/ग़जलों/कविताओं/
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