‘श्री म’ रचित ‘श्रीरामकृष्ण वचनामृत’ से सभी परिचित हैं। इस पुस्तक का भारतीय तथा विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है, और असंख्य लोग इसका प्रतिदिन पाठ करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि ‘श्री म’ द्वारा अपनी डायरी में लिखे जाने के पूर्व तीन, और उसके बाद एक, इस प्रकार कुल मिलाकर चार और ‘वचनामृत’ लिखे गये थे, और किसी न किसी रूप में प्रकाशित भी हुए थे। स्वामी चेतनानन्द ने इन आठ लेखों में इन सभी ‘वचनामृतों’ के बारे में हमें जानकारी दी है। इनके अतिरिक्त श्रीरामकृष्ण की महासमाधि के बाद वराहनगर मठ की कुछ झाँकियाँ ‘श्री म’ ने अपनी डायरी में लिखी थी। उन्हें भी ग्रन्थकार ने इस संकलन में संयुक्त किया है।”