समाधान खोजें और सफल हो जायें (Hindi Self-help): Samaadhaan Khojen Aur Safal Ho Jaayen (Hindi Self-help)

Bhartiya Sahitya Inc.
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हमारे जीवन का लक्ष्य जैसा भी हो उसे पाने के लिए पहला कदम हमें ही उठाना पड़ता है। एक हजार मील की दूरी तय करने के लिए शुरुआत पहले कदम से ही होती है। इस पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में लिखे अनमोल सफलतम नियमों का पूरा-पूरा लाभ लेने के लिए जरूरी है कि आप बहुत ही धैर्य एवं विश्वास के साथ समझते हुए पढ़ें। अभी तक जिसका लक्ष्य निर्धारित नहीं हुआ होगा तो उसका लक्ष्य तय हो जायेगा और जिसका लक्ष्य निर्धारित होगा तो उसको उसका लक्ष्य पाने का सरल उपाय मिल जायेगा। समस्या किसी भी क्षेत्र से हो उसका समाधान इस पुस्तक को पढ़ते-पढ़ते मिल ही जायेगा। नकारात्मक विचारों में ही सारी समस्याओं का कारण छिपा होता है। समाधान पाने के लिए उन कारणों को कैसे खोजा जाये। इसका तरीका इस पुस्तक में दिया गया है। बेहद सावधानी से इस पुस्तक को पढ़ने की जरूरत है। क्योंकि कब किस पेज पर आपको वह उपाय मिल जाय जिसके मिलते ही आपके मार्ग की कुछ ऐसी बाधाएं समाप्त हो जायें जिनके होने से आपका विकास न हो रहा हो और आप लम्बे समय से उसी स्थान पर रुककर अपने आपसे ही युद्ध लड़ रहे हों। ऐसे संकट के समय में यह पुस्तक आपकी जरूर मदद करने वाली है। इस पुस्तक को छोटे-छोटे अध्यायों में लिखने का उद्देश्य मात्र यह है कि आपका समय धन एवं उर्जा का न्यूनतम् निवेश हो और लाभ की प्राप्ति अधिकतम् हो। टकराव और समस्या का जन्म दूसरों को बदलने के परिणाम स्वरूप होता है। इसलिए समाधान और सफलता पाने के लिए खुद को बदलने के लिए तैयार रहें। हर दिन सफल होने के नियमों पर चलने वाले ही एक दिन महानतम् सफलताओं एवं उपलब्धियों को प्राप्त कर ही लेते हैं। एक दिन में ही अधिकतम् सफलता चाहने वाले लोगों को निश्चित ही नकारात्मक परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि यही सृष्टि का अटल नियम है
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About the author

सत्य नारायण श्री ब्रायन टेसी प्रेरक समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं। यह एक प्रेरक वक्ता एवं लेखक के रूप में वर्तमान समाज को दिशा देने का कार्य अनेकों माध्यमों से करते आये हैं। दैनिक एवं समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में इनके प्रेरित करने वाले लेख कई वर्षों से छपते रहे हैं। इन्होंने स्कूल, कालेज एवं सार्वजनिक स्थानों पर और हालों के मंचों पर सेमिनारों में अपने कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया है। इनके जीवन का उद्देश्य ही है लोगों को लाभ पहुँचाना।         
इन्होंने बी0एड0, एम0ए0 (समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र एवं दर्शनशास्त्र), एम0 फिल0 (राजनीतिशास्त्र), मूल्य शिक्षा एवं आध्यात्म में पी0 जी0 डिप्लोमा कोर्स, रेकी हीलिंग कोर्स तथा पास्ट लाईफ रिग्रेशन एवं लव इन्टेन्सिव कोर्स किया है। इसी क्षेत्र में अध्ययनरत् हैं।
समाज को बहुत कुछ ऐसा देने की प्रेरणा से नौकरी की तरफ से इनका ध्यान हट गया और इस संकल्प के साथ प्रेरण एवं लेखन के क्षेत्र में समर्पण कर दिया कि इनका जीवन समाज सेवा के लिए है।
‘विचारों की शक्ति और सफलता’ इनकी पहली महान एवं अद्भुत पुस्तक है। जिसमें इन्होंने 20 वर्षों के अनुभव को देने की कोशिश की है। इनका विश्वास है कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लोगों के जीवन में अवश्य सकारात्मक परिवर्तन होंगे और आपके जीवन में वो सारी चीजें प्राप्त होंगी जिनकी आपको तलाश होती है।
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Additional Information

Publisher
Bhartiya Sahitya Inc.
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Published on
Sep 21, 2014
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Pages
205
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ISBN
9781613014967
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Language
Hindi
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Genres
Foreign Language Study / Hindi
Self-Help / Personal Growth / Success
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Content Protection
This content is DRM protected.
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 प्रखर वक्ता होना, ओजस्वी वाणी का स्वामी होना, प्रभावी शैली में श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने की क्षमता जिसमें हो, वह सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक सफल होने की संभावना रखता है। बातचीत करना भाषण की कला सीखने का सबसे पहला सिद्धांत है। शुरुआती दौर में स्वर एवं अंदाज जैसी कलाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती है। बातचीत करना कला को सीखने का पहला सिद्धांत है; अर्थात् बोलिए, वादविवाद में हिस्सा लीजिए, अपनी प्रतिभा का स्वयं आकलन कीजिए और दर्शकों की आलोचना से सीखने की कोशिश कीजिए।

सवाल है कि खुद की गलतियों को कैसे समझा जाए? इसके लिए कुछ तथ्यों को समझने की आवश्यकता है—महान् वक्ता में कौन से विशेष गुण होते हैं और उन गुणों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है? स्वयं के व्यक्तित्व में ऐसी कौन सी कमी है, जो इन गुणों की प्राप्ति में बाधा बन सकती है? इस विषय पर महान् लेखक डेल कारनेगी की सदाबहार एवं सर्वाधिक पसंद की जानेवाली इस पुस्तक के द्वारा कोई भी सामान्य व्यक्ति दर्शकों के समक्ष बोलने के क्षेत्र में कामयाबी के शिखर तक पहुँच सकता है।

स्वामी विवेकानन्द के सन्देशों में भारत के आध्यात्मिक भण्डार का सारतत्त्व समाहित है जिसे उन्होंने आधुनिक परिप्रेक्ष्य में वैज्ञानिक आधार पर सहज-सरल शब्दों में हमारे समक्ष प्रस्तुत किया है। ये सभी विश्वमानवता के लिए प्रेरणादायी हैं. समाज के सभी वर्ग, सभी धर्म एवँ सभी जातियों के मनुष्यों के लिए समान रूप से उपयोगी है। स्वामीजी की शक्तिशाली प्रोत्साहक वाणी युवकों के मन को जगाने वाली है। आत्मविश्वास एवं जीवन की समस्याओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करने वाली, उनके हदय में प्रेम एवं सेबाभाव उत्पत्न्न करनेयाली, हमेशा नैतिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करने वाली एवं जीवन की कठिनाइयों और अनिश्चितता के समय सही मार्गदर्शन करने वाली है। प्रस्तुत पुस्तक स्वामी के प्रसिद्ध उपदेशों एवं प्रेरणादायी उक्तियों का संग्रह है, जिसे विवेकानन्द साहित्य से लिया गया है
इंसान का मन विचार निर्माण करने की फैक्टरी है जिससे बिना रुके विचार प्रकट हो रहे रहे हैं। अनचाहे, जमा हो चुके विचारों की वजह से तनाव और दुःख का निर्माण होता है। क्या इन विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है... कोई दिशा दी जा सकती है... या इन्हें रोका जा सकता है... क्या इन विचारों का निर्माण लाभ देनेवाले, सकारात्मक रूप से हो सकता है। इस पुस्तक में सरश्रीजी विचारों के नियमों को समझाते हैं। विचारों को कैसे नियंत्रित किया जाए तथा दिशाहीन विचारों को कैसे उपयुक्त दिशा देकर उनसे कार्य करवाया जाए।विचार नियम क्या है?क्या यह संभाव है विचार नियम के इस्तेमाल से इंसान के द्वारा कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है?क्या यह संभव है कि दो परस्पर विरोधी विचारों के परिणाम वास्तविक जीवन में देखने को मिलते हैं?हमारे जीवन को विचार नियम कब, क्यों और कैसे प्रभावित करते हैं?मन को पुराने नकारात्मक विचारों से मुक्ति कैसे मिले?यह कैसे पता चले कि कोई घटना दिव्य योजना के अनुसार हो रही है या नहीं?हमारे अवचेतन मन की प्रोगामिंग कब और कैसे होती है तथा क्या उस प्रोग्रामिंग को बदला जा सकता है?विचारों के ध्यान के लिए कौनसी मूल बातें हैं?
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