इस पुस्तक में पंचतंत्र की सभी चौंसठ कहानियाँ पाँचों तंत्रों में सुव्यवस्थित — मित्रभेद, मित्रसम्प्राप्ति, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाश और अपरीक्षितकारक। हर कहानी सरल भाषा में, मूल भावना को बनाए रखते हुए प्रस्तुत की गई है।
यह पुस्तक हर उम्र के पाठकों के लिए है — बच्चों को कहानी सुनाते समय, या स्वयं नीति और जीवन-दर्शन को नए सिरे से समझने के लिए। एक ऐसी विरासत जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती रहेगी।
हिंदी साहित्य दर्पण द्वारा सावधानीपूर्वक संकलित और प्रस्तुत।