असंभव क्रांति (Hindi Rligious): Asambhav Kranti (Hindi Rligious)

Bhartiya Sahitya Inc.
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प्रस्तुत पुस्तक ओशो के माथेरान आश्रम में 1967 में हुए साधना शिविर में चार दिनों में दिये गये प्रवचनों का अनुपम संग्रह है। इन प्रवचनों में जीवन के विभिन्न रूपों और स्थितियों पर ओशो ने प्रकाश डाला है।
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About the author

 ओशो रजनीश (ओशो कम्यून के संस्थापक)

जीवनपरिचय
जन्म - 11 दिसम्बर 1931
कुचवाड़ा ग्राम, मध्यप्रदेश, भारत।
कहा जाता है 21 वर्ष की आयु में सम्बोधि प्राप्त की।
पूरा नाम - चन्द्रमोहन रजनीश जैन।
अध्ययन – जबलपुर, सागर
अध्य़ापन – महाकोशल महाविद्यालय, जबलपुर, दर्शन शास्त्र के प्राध्यापक ( नौ वर्ष)
योग विधी - नवसंन्यासी दीक्षा के माध्यम से आरम्भ किया
- 1970, डायनमिक योग।
निर्वाण - 19 जन. 1990,

स्थापित संस्थायें
श्री रजनीश आश्रम, पूना। 1974। (ओशो कम्यून), ओरेगन (यू.एस.ए.)


योग पर उनके मन्तव्यों का संकलन दो संकलित ग्रन्थों के रूप में मिलता है – पतंजलि योग सूत्र पर उनके प्रवचन, एवं योग नये आयाम।

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Additional Information

Publisher
Bhartiya Sahitya Inc.
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Published on
Jul 11, 2014
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Pages
171
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ISBN
9781613014509
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Language
Hindi
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Genres
Foreign Language Study / Hindi
Self-Help / Motivational & Inspirational
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ओशो एक अनूठे मनीषी हैं जिन्होंने पृथ्वी पर एक सर्वथा नये मनुष्य की अवधारणा दी। उन्होंने स्पष्ट और बार-बार घोषणा की कि आने वाले वर्षों में या तो पृथ्वी एक नये मनुष्य का जन्म देखेगी और या फिर मनुष्य जाति का संपूर्ण विनाश देखेगी; तीसरा कोई विकल्प नहीं है। यह बहुत निर्णायक घड़ी है। मनुष्य जाति के ज्ञात इतिहास में ऐसी निर्णायक घड़ी कभी न थी कि मनुष्य पृथ्वी पर स्वर्ग उतार सकता है, ऋषियों-मुनियों के स्वप्निल स्वर्ग को यथार्थ में बदल सकता है और या अगर अपनी मूढ़ता भरी धारणाओं, परंपराओं और मान्यताओं की जकड़ में पड़ा रहा तो पृथ्वी पर से न केवल मनुष्य वरन् संपूर्ण जीवन का विनाश होगा जो कि अस्तित्व के लिए भी बहुत बड़ी हानि की बात है। सृष्टि के विकास में करोड़ों-करोड़ों वर्षों में पृथ्वी बनी और पृथ्वी के रूप लेने के भी 40 लाख वर्षों बाद मनुष्य बना। अत: अगर वह नष्ट होता है तो यह बहुत बड़े नुकसान की बात होगी
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