राष्ट्रीय नवोत्थान

Suruchi Prakashan
162

K Suryanarayan Rao, the Author had provided his best account
recollecting the writings and thoughts of Swami Vivekananda was reaffirmation
of the mission of RSS which was also spelt by another great Hindu Nationalist
M.S. Golwalkar. Starting with the life-sketch of Swami Vivekananda and his
mentor Swami Ramakrishna Paramhamsa. The editor shows how the ‘Sangh Sanchalak’
Dr. Hedgewar and Guru Golwalkar, followed the young saint who inspired the
world. The compilation also reminds that the unfinished task has to be
completed with dedication. It would be fitting tribute to Swami Vivekananda. 

Read more

Reviews

4.5
162 total
Loading...

Additional Information

Publisher
Suruchi Prakashan
Read more
Published on
Aug 1, 2013
Read more
Pages
332
Read more
ISBN
9788189622978
Read more
Read more
Best For
Read more
Language
Hindi
Read more
Genres
Philosophy / Ethics & Moral Philosophy
Read more
Content Protection
This content is DRM protected.
Read more

Reading information

Smartphones and Tablets

Install the Google Play Books app for Android and iPad/iPhone. It syncs automatically with your account and allows you to read online or offline wherever you are.

Laptops and Computers

You can read books purchased on Google Play using your computer's web browser.

eReaders and other devices

To read on e-ink devices like the Sony eReader or Barnes & Noble Nook, you'll need to download a file and transfer it to your device. Please follow the detailed Help center instructions to transfer the files to supported eReaders.
Rajyogi Nikunj
प्रिय पाठक,

कहते हैं की ‘ज्ञान जितना बांटो उतना बढ़ता है’ अतः जिंदगी में जो भी सुना, समझा और अनुभव किया उसे दूसरों के संग बांटने से अत्यंत ख़ुशी और संतोष प्राप्त होता है| एक ‘अध्यात्मवादी’ के रूप में पिछले २५ वर्षो के तपस्वी जीवन में मैंने कई सारे विशिष्ट अनुभव किये जिन्हें शब्दों का रूप देकर आप सभी पाठकों के समक्ष रखने जा रहा हूँ | अध्यात्मिक पथ पर चलते चलते मैंने लगातार खुद का विश्लेषण कर अपने आप को पुन: खोजने का प्रयास किया हैं | एक स्तंभ-लेखक के तौर पर मैंने सदैव यही कोशिश की है की मै अपने पाठको के समक्ष वही बातें पेश करूँ जिन्हें मैंने स्वयं अनुभव किया हैं | मेरे अनुभव की इस सुंदर यात्रा को सुखद बनाने के लिए मैं सर्व प्रथम ‘परमपिता परमात्मा’ का आभार मानता हूँ और साथ साथ ब्रह्माकुमारिज़ संस्था की पूर्व मुख्य प्रशाशिका दादी प्रकाशमणि जी,दादी हृदयमोहिनी जी,दीदी नलिनी जी, दादा करुणा जी एवं वे सब ज्ञानी-गुणीजनो का भी शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने मुझे अध्यात्मिक प्रज्ञा से नवाज़ा और इस लायक बनाया जो मैं आज अच्छा सोच व् लिख सकूँ, | अंतमे मैं विश्वभर के, उसमे भी खास भारत के विभिन्न अखबारों के संपादकों और उनके सहकारियों को धन्यवाद करता हूँ की जिन्होंने पिछले ६ साल में मेरे द्वारा लिखे गये ३००० से भी अधिक लेख अपने अपने प्रकाशनों द्वारा प्रकट करके आप सभी पाठकों के ज्ञान में वृद्धि की | मुझे आशा व् विश्वाश हैं की ‘गूगल’ के इस सुप्रयास के द्वारा मैं आप सभी को कुछ नवीनतम ज्ञान व् अनुभवों से लाभान्वित कर सकूँगा |ओम शांति |

मानवता की सेवा में सदैव

राजयोगी निकुंज                   
©2018 GoogleSite Terms of ServicePrivacyDevelopersArtistsAbout Google
By purchasing this item, you are transacting with Google Payments and agreeing to the Google Payments Terms of Service and Privacy Notice.