Inspirational Short Stories 2: Moral, Spiritual and Patriotic

Suruchi Prakashan
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Bharat is a blessed land (Punya Bhoomi) of Gods,
Sages, Rishis, Seers and thinkers. Besides, great
Emperors, social reformers, scientists and patriots also
graced this land and made invaluable contributions in
various walks of life. The depiction of moral, ethical,
spiritual as well as patriotic values they possessed is a
very significant aspect of our great cultural heritage. In
order to preserve the cultural and traditional treasure of
our values and beliefs Suruchi Prakashan has always
strived to publish such literature which seeks to
promote social and cultural cohesion and nationalist
spirit especially among children and youth.
In pursuance of the above endeavour, we propose to
bring out a series of "Inspirational Short Stories" based on
actualized instances from the galaxy of our great
personalities and inspiring tales and folklores from our
ancient past.

 

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4.7
11 total
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Additional Information

Publisher
Suruchi Prakashan
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Published on
Apr 1, 2017
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Pages
24
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ISBN
9789386199423
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Best For
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Language
English
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Content Protection
This content is DRM free.
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Sankalit

 स्व-देश मतलब अपना देश और देश के लोगों द्वारा निर्मित वस्तुएँ ही स्वदेशी होती हैं। स्वदेशी एक भावना है जिसके आधार पर युवाओं को रोजगार मिलता है, देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और देश गौरवान्वित होकर समृद्ध बनता हैI आज उस स्वदेशी भावना में गिरावट आती जा रही है और विदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ता जा रहा है। आज कुछ लोग उसके लिए गुणवत्ता को आधार मानते हैं। यह कहना सरासर गलत है। हमारे देश में निर्मित ढाका की मलमल, कुतुब मीनार के पास बना लौह स्तम्भ, जिसमें कभी भी जंग नहीं लगता, भागलपुर की सिल्क, सम्भल में बने सींग का सामान, खजुराहो और अजन्ता, एलोरा के भित्ति चित्र, गुलाब का इत्र, काष्ठ और पाषाण से बनी मूर्तियाँ गुणवत्ता के प्रतिमान हैं। आज चीन ने सस्ता माल बेचकर हमारे देश के व्यापार को चौपट कर दिया है। लेकिन उसकी गुणवत्ता का घटियापन अब लोगों की समझ में आ रहा है और इसके कारण चीन से आयात में काफी गिरावट आई है। हम सब भारतवासियों का कर्तव्य है कि हम विकास के इस युग में स्वदेशी भावना से तादात्मय बनायें, स्वदेशी वस्तुओं के उत्पादन व उपयोग को प्रोत्साहित करें और लघु उद्योगों द्वारा स्वदेशी निर्माण को गति प्रदान करेंI तभी हमारा देश आगे बढ़ेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और सर्वत्र समृद्धि का पदार्पण होगाI

 

 

Sankalit

पर्यावरण का अर्थ है - हमारे आसपास का समूचा प्राकृतिक परिवेश जैसे - वायु, भूमि, जल, वन, पेड़-पौधे, फल व जीव-जन्तु। जो भी हम अपने चारों ओर देखते हैं, यहाँ तक कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के आकाशीय पिंड भी पर्यावरण का निर्माण करते हैं। समस्त प्राणीजगत् व वनस्पति जगत् का आधार पर्यावरण ही है। ईश्वर ने पर्यावरण के विभिन्न घटकों के मध्य एक ऐसा संतुलन बनाया ताकि हमारा जीवन सुख-शांति से व्यतीत हो सके।

          परन्तु मानव ने अपनी अबाधित व असंयमित लोभ-लालसा की पूर्ति हेतु इस दिव्य संतुलन को बिगाड़ दिया। आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है - पर्यावरण प्रदूषण। भारतीय संस्कृति व दर्शन में पर्यावरण के विभिन्न अवयवों - नदी, पर्वत, वृक्ष, वनस्पति व जीव-जन्तु को देवतुल्य मानकर उनकी पूजा-उपासना की गई है व उनके अनुशासित व संतुलित उपभोग पर विशेष बल दिया गया है।

          वृक्षारोपण द्वारा कैसे हम पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं व इससे जुड़ी प्रत्येक जानकारी इस पुस्तक में समाहित है।   

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