''अपनी पलकों से आंसू पोंछ डालो सलमा... और एक वादा करो मुझसे-कि जब हिंदोस्तान और पाकिस्तान के हालात अच्छे हो जाएगे... इन दोनों मुल्कों के दरमियान उठी नफ़रत की दीवारें ढह जाएंगी तो तुम वहां जाओगी... मेरी मां से मिलने... देखो कुल्लू की वादी में एक छोटा सा गांव है मनाली... वहीं तुम्हारी सास, देवर और देवरानी रहते हैं... वह सब तुमसे बहुत प्यार करते हैं... और मेरी मां तो तुम्हें सीने से लगाने के लिए तड़प रही है... वह अपनी नई बहू को उन्हीं कपड़ों और ज़ेवरों से सजाना चाहती है जो शादी के दिन तुमने पहने थे... जब उसे मालूम होगा कि तुम्हारा सुहाग उजड़ गया है... उसका बेटा इस दुनियां में नहीं रहा तो उस पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ेगा... शायद तुम्हें पाकर उसका ग़म कुछ हल्का हो जाए... इसलिए वादा करो कि उसके ज़ख्मों पर मरहम रखने के लिए तुम ज़रूर जाओगी...।''
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Romance
Ratings and reviews
4.2
43 reviews
5
4
3
2
1
Pravin Ram
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February 11, 2017
Read most of gulshan nandas novel just loved it .He's just amazing author and one of my favorite
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Snehal b
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December 23, 2016
Many years ago I had read this novel. I like very much.marathi translated also verry nice.
5 people found this review helpful
Kalpana Surti
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March 4, 2016
loved it.
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About the author
गुलशन नन्दा (मृत्यु 16 नवम्बर 1985) हिन्दी के प्रसिद्ध उपन्यासकार तथा लेखक थे जिनकी कहानियों को आधार रख 1960 तथा 1970 के दशकों में कई हिन्दी फ़िल्में बनाई गईं और ज़्यादातर यह फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस में सफल भी रहीं। उन्होंने अपने द्वारा लिखी गई कुछ कहानियों की फ़िल्मों में पटकथा भी लिखी। उनके द्वारा लिखी गई कुछ हिट फ़िल्मों के नाम हैं- काजल, पत्थर के सनम, कटी पतंग, खिलौना, शर्मीली इत्यादि हैं। इसके आलावा उनके लिखे कुछ उपन्यासों के नाम हैं - अजनबी, अन्धेरे चिराग, आसमान चुप है, कटी पतंग, कलंकिनी, काँच की चूड़ियाँ, काली घटा, गुनाह के फूल, गेलार्ड, घाट का पत्थर, चिनगारी, जलती चट्टान, झील के उस पार, टूटे पंख, डरपोक, तीन इक्के, तीन रंग, देव छाया, नीलकंठ, पत्थर के होंठ, पिंजरा, प्यासा सावन, भँवर, माधवी, मेंहदी, मैं अकेली, रूपमती, वापसी, सांवली रात, सितारों से आगे, सिसकते, सूखे पंड़ सब्ज़ पत्ते आदि।
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