पहर की परछाई

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कभी हवा कभी चांद कभी रात जिन्दगी के कुछ सुलझे उलझे खयाल बस इतना की लमहा न छूटे जिन्दगी हर पलपुरानी पर नई है, कुछ  एैसे ही पलो की सरगोशी शब्दों में थामने की कोशिश है, पहर की परछाई ।
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About the author

लता प्रसाद व्यवसाय से चिकित्सक हैं । कविता मन को, जीवन को व्यक्त करने का माध्यम ।
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Additional Information

Publisher
Notion Press
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Published on
Nov 17, 2017
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Pages
60
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ISBN
9781948146722
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Features
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Language
Hindi
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Genres
Poetry / Subjects & Themes / General
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‘रूबरू’ महज़ एक  पुस्तक ही नहीं अपितु एक ऐसा खूबसूरत प्रयास है जिसमें सम्मिलित की गईं ग़ज़लें हर आयु वर्ग के पाठकों को एक आईने के सामने ले जाती हैं जहां उन्हें अपने अतीत एवं वर्तमान के खट्टे-मीठे अनुभवों की झलक दिखाई पड़ती है।  इसमें भावनाओं का समंदर है और मन एक ऐसी  कश्ती है जो मंज़िल तक पहुंचने की ज़िद में उफनती हुई लहरों का डटकर मुकाबला करती  प्रतीत होती है।  यह पुस्तक हमें रूबरू करवाती है अपने प्रेम से, पीड़ा से, वियोग से, ख़ुदा से, प्रकृती से और अन्य तमाम ऐसे पहलुओं से जिनसे हम हर रोज़ वाबस्ता होते हैं।  इसमें 72 ग़ज़लों को बेहद ख़ूबसूरती से संजोया गया है।  रूबरू के रूबरू होते हुए पाठक सहज ही एक रिश्ते में बंध जाता है। ग़ज़लों  की संगीतात्मिकता उन्हें गुनगुनाने को विवश कर देती है। निस्संदेह हिंदी ग़ज़ल साहित्य की महफ़िल में ‘रूबरू’ का आगमन स्वागतयोग्य है।
Poetry comic attempt to bring forth the plight, struggle of theatre artists in India.

जब समाज के एक बड़े तबके का ध्यान गरीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी और जीवन के लिए ज़रूरी बातों पर लगा होता है तो कला जगत को अपने रचनाओ के लिए कई मुद्दे मिलते हैं लेकिन उसी कला जगत को खाने के लाले भी पड़ जाते हैं। ज़िन्दगी के लिए की ज़रूरी चीज़ें जुटाने को घिसटता समाज कला को सिर के बालों की तरह मान लेता है। बालो के बिना भी जीवन चल सकता है तो ऐसे परिवेश में कलाकार सिर के बालों की तरह उड़ जाते हैं, जबकि कला तो समाज की आत्मा, हृदय सी होती है। आत्मा बिना एक रोबोट सा जीना भी क्या जीना? भारतीय नाट्य, थिएटर कलाकारों को ऐसे माहौल में अपनी प्रतिभा, कला को संजो कर गुज़ारा करना पड़ता है। जहाँ संसाधनों की बर्बादी की इतनी ख़बरें आती हैं तो लगता है कि अगर उस अपव्यय में से थोड़ी सी कद्र ऐसे कलाकारों को मिल जाए तो कितने जीवन सफल हो जाएं। एक काव्यांजलि सभी सच्चे अदाकारो-कलाकारों के नाम!

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