हिंदी कथा-साहित्य की सबसे सशक्त और अविस्मरणीय कहानियों में से एक, 'कफन', के साथ प्रस्तुत है मुंशी प्रेमचंद की 14 चुनी हुई रचनाओं का यह अप्रतिम संग्रह। यह संकलन पाठकों को मानवीय संवेदनाओं के उस गहरे यथार्थ से परिचित कराता है, जिसके चित्रण में प्रेमचंद को महारत हासिल थी।
इस संग्रह का आरम्भ 'कफन' जैसी दिल दहला देने वाली कहानी से होता है, जो गरीबी और सामाजिक संवेदनहीनता का एक नग्न और क्रूर सत्य प्रस्तुत करती है। वहीं 'आहुति' और 'दो बहनें' जैसी कहानियाँ त्याग और पारिवारिक रिश्तों की परतों को खोलती हैं।
लेकिन प्रेमचंद केवल गंभीर विषयों के चितेरे नहीं हैं। 'पंडित मोटेराम की डायरी' और 'कश्मीरी सेब' में उनका तीखा व्यंग्य समाज के पाखंड और मानवीय कमजोरियों पर सटीक प्रहार करता है। इस संग्रह की एक अनूठी विशेषता 'लेखक' और 'मेरी पहली रचना' जैसी कहानियाँ हैं, जो स्वयं एक लेखक के जीवन, उसकी चुनौतियों और सृजन प्रक्रिया की एक दुर्लभ झलक देती हैं। 'प्रेम की होली' और 'होली का उपहार' में आप रिश्तों के उत्सवधर्मी रंगों से रूबरू होंगे।
कथा-विविधता, भावनात्मक गहराई और सामाजिक चेतना से परिपूर्ण यह संग्रह प्रेमचंद के साहित्यिक विस्तार को समझने के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। यह हर उस पाठक के लिए है जो साहित्य को उसके सबसे खरे, शक्तिशाली और अविस्मरणीय रूप में अनुभव करना चाहता है।
प्रेमचंद
(31 जुलाई, 1880 - 8 अक्टूबर 1936)
हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी शती के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में की तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं।