कविताओं का यह संकलन पाठक के प्रेम अतीत को दोहराने में उसकी मदद कर उसे कुछ पल का सुकून देगा। प्रेम उम्र के बढऩे के साथ एक अनुछुई अनुभूति नहीं है, इसका गाढ़ापन इसकी सांद्रता उम्र के साथ बढ़ जाती है, सफल पारिवारिक जीवन एवं आधुनिक छोटे परिवार की यह कसौटी है। यह वर्तमान का संबल है, इमारत का मजबूत खम्बा है। यह असमय बिखराव को भी रोकेगा। यहाँ मांसलता को सीढ़ी बनाकर चढ़ा प्रेम परिपक्वता के आकाश में उन्मुक्त पंछियों की तरह विचरण करता हुआ दिखेगा।