कबीरदास की साखियां (Hindi Wisdom-bites): Kabirdas Ki Sakhiyan (Hindi Wisdom-bites)

Bhartiya Sahitya Inc.
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साखियां यों तो सभी संतों की निराली हैं। एक-एक शब्द उनका अन्तर पर चोट करता है। पर कबीर साहब की साखियों का तो और भी निराला रंग है। वे हमारे हृदय पर बड़ी गहरी छाप छोड़ जाती हैं। सीधे-सादे अनपढ़ आदमी पर तो और भी अधिक ये साखियां अपना अमिट प्रभाव शायद इसलिए डाल जाती हैं कि उन्हीं की तरह एक अनपढ़ संत ने सहज-सहज जीवन को पहचाना था और उसके साथ एकाकार हो गया था। दूसरों के मुख से सुनी उसने कोई बात नहीं कही, अपनी आंखों-देखी ही कही। जो कुछ भी कहा अनूठा कहा, किसी का जूठा नहीं
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About the author


वियोगी हरि (1896-1988 ई.) 

प्रसिद्ध गांधीवादी एवं हिन्दी के साहित्यकार थे। ये आधुनिक ब्रजभाषा के प्रमुख कवि, हिंदी के सफल गद्यकार तथा समाज-सेवी संत थे। "वीर-सतसई" पर इन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला था। उन्होंने अनेक ग्रंथों का संपादन, प्राचीन कविताओं का संग्रह तथा संतों की वाणियों का संकलन किया। कविता, नाटक, गद्यगीत, निबंध तथा बालोपयोगी पुस्तकें भी लिखी हैं। वे हरिजन सेवक संघ, गाँधी स्मारक निधि तथा भूदान आंदोलन में सक्रिय रहे।
जीवनवृत्त
वियोगी हरि का जन्म छतरपुर (मध्य प्रदेश) में सन 1896 ई० में एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण वंश में हुआ था। पालन-पोषण एवं शिक्षा ननिहाल में घर पर ही हुई।
कृतियाँ एवं संकलन
वियोगी हरि ने लगभग 40 पुस्तकें रची हैं। इनकी मुख्य रचनाएँ हैं-
'भावना, 'प्रार्थना, 'प्रेम-शतक, आधुनिक युग, साहित्य विहार, वीर सतसई, प्रेम पथिक, वीणा, प्रेमांजलि, प्रेमशतक, तरंगिणी, अन्तर्नाद, पगली, प्रार्थना, छद्मयोगिनी, वीर हरदौल, मेरा जीवन प्रवाह, मंदिर प्रवेश, मेवाड़ केसरी, बुद्ध वाणी, विश्वधर्म।

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Additional Information

Publisher
Bhartiya Sahitya Inc.
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Published on
Apr 3, 2014
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Pages
51
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ISBN
9781613013458
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Language
Hindi
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Genres
Foreign Language Study / Hindi
Religion / Biblical Studies / Wisdom Literature
Self-Help / Spiritual
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Sirshree
यह पुस्तक जीवन के जीवन यानी महाजीवन तथा मृत्यु की मृत्यु का रहस्य उघाड़ती है। इस पुस्तक में एक सी.इ.ओ. (मिस्टर जीवन) और स्पिरिच्युअल मास्टर के बीच हुआ वार्तालाप यह रहस्य खोलता है। यह रहस्य खुलते ही एक के बाद एक सारे अनसुलझे सवालों के जवाब उजागर होने शुरू हो जाते हैं। जैसे कि मृत्यु के बहुत पहले क्या होता है? ठीक पहले क्या होता है? मृत्यु के समय क्या होता है? मृत्यु के ठीक बाद और मृत्यु के बहुत बाद क्या होता है? मैं मृत्यु के भय पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता हूँ? और किसी प्रियजन की मृत्यु के दुःख से कैसे बाहर आ सकता हूँ? मृत्यु उपरांत जीवन का क्या सबूत है? क्या मुझे इस पर विश्वास करना चाहिए?
 
इस पुस्तक द्वारा आप अपने जीवन का तथा जीवन में किए जानेवाले कर्मों का महत्त्व जानेंगे। इस पुस्तक का महत्त्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह न सिर्फ सिद्ध करता है कि मृत्यु उपरांत जीवन, जिसे इस पुस्तक में पारटू कहा गया है, अस्तित्त्व में है बल्कि यह आपको पारटू के लिए प्रशिक्षित भी करता है, जिसके लिए ही आपका पृथ्वी पर जन्म हुआ है।
 
इस संसार के पार दूसरे रहस्यमय, अनूठे सूक्ष्म संसार का सरश्री द्वारा रहस्योद्घाटन। मृत्यु उपरांत जीवन पर चर्चा-परिचर्चा में सरश्री द्वारा दिए गए बोधपूर्ण उत्तर, जो मृत्यु के भय से मुक्त कर परमानंद की ओर ले जाते हैं। जो अंधविश्वासों, गलत धारणाओं और नकारात्मक विचारों से मुक्त कर हमारी समझ को विकसित करते हैं। जो सूक्ष्म संसार में चेतना के उच्चतम स्तर पर जाने के लिए इस संसार में जीवन को प्रशिक्षित करने और सत्य श्रवण द्वारा समझ विकसित करने पर बल देते हैं।
Sirshree
निर्णय लेते समय इंसान को वचनबद्ध होना चाहिए। वचनबद्धता में टालमटोल करने के लिए इंसान "अगर', "मगर', "यदि' और "लेकिन' शब्द इस्तेमाल करता है। हर बार काम और जिम्मेदारी से भाग-भागकर इतनी बड़ी घटनाएँ हो जाती हैं कि इंसान के पास फिर पछतावे के अलावा कुछ और नहीं बचता। उसके बाद वह चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, कुछ नहीं कर पाता। जीवन में ऐसी परिस्थिति न आए इसलिए पहले ही इंसान को जिम्मेदारी उठाना, वचनबद्ध होना और निर्णय लेने की कला सीखनी चाहिए। यही इस पुस्तक का उद्देश्य है।
 
इसके अलावा इस पुस्तक में पढ़ें:-

* सबसे बड़ी जिम्मेदारी कैसे लें
* उच्च निर्णय क्षमता कैसे बढ़ाएँ
* उठी हुई चेतना से निर्णय कैसे लें
* निर्णय न लेने का निर्णय कैसे लें
* समय रहते निर्णय लेने की कला कैसे सीखें
* जिम्मेदारी आज़ादी की घोषणा है, जिम्मेदारी लेकर आज़ादी कैसे प्राप्त करें
* गैर जिम्मेदारी के परिणामों से कैसे बचें
* वादे निभाने की शक्ति द्वारा वचन पर कायम कैसे रहें
* लिए गए कार्य को दिए गए समय पर कैसे पूर्ण करें
* निरंतर अभ्यास से अपने अंदर दृढ़ संकल्प का निर्माण कैसे करें
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