नाचो जीवन है नाच (Hindi Rligious): Naacho Jivan Hai Naach (Hindi Rligious)

Bhartiya Sahitya Inc.
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प्रस्तुत पुस्तक में ओशो के अलग-अलग स्थानों 1967-68 में हुए प्रवचनों का अनुपम संग्रह है। इन प्रवचनों में जीवन के विभिन्न रूपों और स्थितियों पर ओशो ने प्रकाश डाला है।
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Publisher
Bhartiya Sahitya Inc.
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Published on
Aug 11, 2014
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Pages
104
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ISBN
9781613015469
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Language
Hindi
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Genres
Foreign Language Study / Hindi
Religion / Hinduism / General
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पूछो या न पूछोए उत्तर दिए जा रहे हैं। उत्तर में ही दे रहा हूं। अगर तुमने धैर्य रखा और न पूछाए तो भी उत्तर मिल जाएगा। अधैर्य कियाए पूछा तो भी उत्तर मिल जाएगा। मेरे तुम्हारे बीच संवाद चल रहा है। अभी इसी क्षण मैं यहां उपलब्ध् हूं। भविष्य की प्रतीक्षा न करेंए अपना हृदय खोलेंए अधिक से अधिक ग्राहता उत्पन्न करें और मेरे साथ लयबद्ध हो जाएं। हर चीज संभव है। इसी क्षण मैं तुम्हें मेरे रहस्य की कुंजी दे सकता हूं। तुम्हें विकसित करने का यह नया दौर शुरू हो चुका है। अब इसके लिए तैयार हो जाएंए क्योंकि यह प्रश्न मुझसे संबंध्ति न होकर तुमसे ही संबंध्ति है। तुम उतना ही प्राप्त कर सकते हो जितनी तुम्हारी क्षमता और सीमा है। यदि तुम पूरी तरह खुले हुए हो तो वह असीमित है। पूरा सागर ही तुम्हारी बूंद में गिरने के लिए तैयार हैए लेकिन बूंद भयभीत है। अपने को बचाने की कोशिश कर रही है।
सदगुरु की शरण में जाकर एक नया जन्म होता है। जहां पुराना गलकर पिघल जाता है और सिर्फ रह जाता है- एक नया मनुष्य। नया मनुष्य बनना अर्थात् बंधनों से मुक्त होना, बच्चे सा निर्दोष बनना। कोरी स्लेट बनना। यह प्रयास से नहीं समझ या बोध से होता है और समझ के अंदर विस्फोट से होता है। पर्त दर पर्त अपने को उखाड़ते जाना है। अचेतन को चेतन बनाना है। यह तभी संभव होता है जब नज़र उस नज़र से मिल जाए और कहने को सिर्फ रह जाए- उस नज़र ने क्या से क्या बना दिया। स्वामी ज्ञानभेद भी इन्हीं नजरों द्वारा आत्मा को स्वयं के अहंकार बोध से मुक्त कर अस्तित्व के द्वार पर आखिरी छलांग लगाना चाहते हैं। सदगुरु की अनुकंपा और करुणा ही इसमें उनके साथ है।
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