Intezaar Tumhara

· Harsh Ranjan Jointly With Authors Ink Publication
4.5
2 reviews
Ebook
92
Pages

About this ebook

ॐ नमः शिवाय!


हर्ष रंजन की ओर से आप सब को प्रणाम!

अपनी बाईस नंबर किताब, सारी बिखरी कविताओं को जोड़कर मैंने निकाली है। कई कवितायें सालों से दबी रह गईं थीं। सब कुछ आपके सामने पन्नों पर है! सराहें, क्योंकि बहुत जरूरत है इसकी! कठिन से कठिनतर होते जाते दौरों के बीच अनुभूतियाँ जहाँ एक ओर बाहर से तीक्ष्णतर होती जाती हैं, वहीं दूसरी ओर वो भीतर से और भी ज्यादा नरम हो जाती हैं। कभी-कभी सराहना जीवन के लिए, साँसों से और कलम के लिए, स्याही से बढ़कर हो जाती हैं। ऐसे ही गुजरते दौरों में से एक एक दौर में ये पंक्तियाँ लिखी थीं...

शाम ढलेगी, दिये जलेंगे,

चाँद इशारा करेगा....

जहान बदलेगा…

मुकाम बदलेगा...

ये इंसान बदलेगा...

पर दिल तुम्हारा इंतज़ार दुबारा करेगा!


ऐसी ही परिस्थितियों में जब आस-पास देखा तो लगा कि बहुत सी आम चीजें, उतनी आम नहीं हैं, जितना वो लगती हैं, उनके पीछे बहुत सी विशेषताएँ हैं, ऐसी ही एक विशेषता नीचे की पंक्तियों में लिखी है। कविता संग्रह को पूरा प्यार दें और मैं अगली पुस्तक के लिए काम पर लगता हूँ।



एक आदमी एक झोपड़ा बनाता है,

और बड़े प्यार से उसकी भीतरी

दीवार पर एक औरत की तस्वीर

और द्वार पर एक औरत का नाम

सुनहरे अक्षरों में सजाता है।

एक औरत एक नाम बनाती है,

और थोड़ी सी असुविधा जान,

नाम का एक हिस्सा व

मांग के टेढ़ेपन में सिंदूर का

किस्सा बड़ी हुनर से छिपा जाती है।

औरत समझती है कि

कड़े स्वर वाला पुरुष

उसके सीने पर धरी शिला है,

पुरुष अज्ञान में सोचता है कि

मीठे स्वर में उसे जिंदगी में

सबसे ईमानदार साथ मिला है।

Ratings and reviews

4.5
2 reviews
Angiras Chalakh
October 5, 2023
Nice

About the author

नमस्कार,

मैं हर्ष रंजन अपनी रचनाओं के संसार में आपका स्वागत करता हूँ। मेरी कलम मेरे लिए मेरी आवाज, मेरे सपने, मेरी सच्चाई, मेरी गलतियां, मेरा हथियार और मेरे लिए दुनिया की सबसे पहली टाइम मशीन है। इन वाक्यों में मैं की जगह आप होंगे अगर आप इन किताबों के साथ कुछ कदम एक साथ चलने के लिए तैयार हैं। मेरी किताब न तो सर्कस है, न तो आपका ध्यान और आपके यत्न खींचने के लिए कोई व्यूह, न तो ये सत्संग हैं। ये एक बसा हुआ शहर है जहाँ हर एक अनुच्छेद एक गली है और हर शब्द एक मकान। हर एक कविता, हर कहानी अपने आप में एक संसार है।

मैं आपको दिल की एक बात बताना चाहूंगा। मैंने हिंदी को उसकी शुरुआत और हिंदी के साहित्य को उसकी शुरुआत से जाना है। ये सफर बहुत रोचक है। कई प्रतिभा आयी और हिंदी को कुछ कदम और आगे बढ़ा गईं। मैंने अपने शब्दों का, अपनी शैली का आविष्कार नहीं किया, मैंने एक परंपरा को एक अनुज की तरह आगे बढ़ाया है। साहित्य के वर्णित विषय और साहित्य की शैली पुरानी हो सकती है पर समय का चक्र उन्हें फिर से उभार लाता है।

किताबें पढ़ें और अपने विचार जरूर बताएं।

आभार

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