परन्तु क्या ऐसा भी कोई दिव्य उपचार सम्भव है जिसके द्वारा हम शारीरिक एवं मानसिक रोगों का भली-भाँति उपचार कर सकते हैं? यही इस पुस्तिका की विषय-वस्तु है। स्वामी विवेकानन्द के सबसे कम आयु वाले शिष्य स्वामी परमानन्द ने इस विषय का बड़ा ही विशद वर्णन प्रस्तुत किया है।