Ye Koi Baat hui/ये कोई बात हुई: Meri GhazaleN-1/मेरी ग़ज़लें-1

Sanjay Grover/संजय ग्रोवर
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इनमें से कई ग़ज़लें कई-कई बार छपीं तो कुछेक कई-कई बार चोरी भी हुईं 

( http://samwaadghar.blogspot.in/2011/06/blog-post_29.html ) । 

दिल खोलकर तारीफ़ भी की गयी तो आलोचना की तलवार भी भांजी गयी। पर न तो मैं किसीका शिष्य बन पाया न कोई मुझे अपना गुरु बना सका। अब मज़ा यह कि बीच में न तो संपादक है न कवि-मंचो, सेमिनारों में जुगाड़ भिड़ाकर घुसने की मजबूरियां। इंटरनेटीय लोकतंत्र ने लेखकों/कलाकारों को जनता/दर्शक/ऑडिएंस के बिलकुल सामने खड़ा कर दिया है। यह सीधी मुठभेड़ का वक्त है। ऐसे में मैं  अपना यह ग़ज़ल-संग्रह आपके सामने पेश कर रहा हूं। इसके आवरण भी मैंने ही बनाए हैं।


*राय जुदा-जुदा (पिछले ग़ज़ल-संग्रह पर)*


*देवताओं, अवतारों और खु.दाओं की इस ग़ैर-इन्सानी दुनिया में खुद को एक अदद आदमी बनाए रखने की इसी ज़िद ने ज़िन्दगी की बेहतरी के नये-नये रास्ते बनाए हैं ।
-नरेंद्र, युद्धरत आम आदमी, जुलाई-सितम्बर 2002

*ये तीसरी धारा की वे ग़ज़लें हैं जो न मंचीय हैं न व्यवस्था विरोध के सरल फार्मूले को अपनाती हैं ।
-ज्ञानप्रकाश विवेक (इसी पुस्तक की भूमिका में)

*आपकी ग़ज़लें कहीं-कहीं से कभी अच्छी और कभी बहुत अच्छी लगीं । इन ग़ज़लों के स्वर धीमे मगर गहरे हैं । कहन और कथ्य के मिलाप का सलीका इनका हुस्न है ।
-निदा फ़ाज़ली (शायर को लिखे एक जवाबी ख़त में)

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About the author

*नामः संजय ग्रोवर /
*शिक्षाः बी.कॉम. /
*जन्म तिथिः 05-04-1963/
*सम्प्रतिः स्वतंत्र-लेखन/
*रुचियां : पढना, संगीत सुनना (लाइट एवं क्लासिकल), कार्टूनिन्ग,फैशन-डिज़ाइनिन्ग,
कॉपी-राइटिंग..../
*प्रकाशनः--
जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा, दै.हिन्दुस्तान, अमर-उजाला, दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, दैनिक जागरण, जेवीजी टाइम्स, दैनिक आज, राजस्थान-पत्रिका, अक्षर-भारत, हंस, कादम्बिनी, अन्यथा, मुक्ता, चंपक, बालहंस, कथादेश ,सण्डे पोस्ट वार्षिकी, समयांतर, अक्षरा आदि कई छोटे-बडे़ पत्र-पत्रिकाओं व (अनुभूति, अभिव्यक्ति, वेबदुनिया, शब्दांजलि, कलायन, साहित्यकुंज, रचनाकार, हिन्दी-नेस्ट, देशकाल, मोहल्लालाइव, लेखक मंच, आखर कलश, मीडिया मोरचा, हिंदी गौरव आदि) वेबसाइटस्, फ़ीचर एजेंसिंयों एवं आकाशवाणी/दूरदर्शन पर व्यंग्य-लेख, ग़ज़लें, कविताएं, बालगीत, कार्टून व नारी-मुक्ति पर लेख प्रकाशित/प्रसारित//
*गजल-संग्रह ‘खुदाओं के शहर में आदमी’
एवं व्यंग्य-संग्रह ‘मरा हुआ लेखक सवा लाख का’ प्रकाशित//.
विशेषः-तकरीबन 15-16 की आयु में हस्तलिखित सचित्र बाल पत्रिका ‘निर्माण’ का संपादन व चित्रांकन//

*संपर्क:
147 ए, पॉकेट ए,
दिलशाद गार्डन,
दिल्ली-95 फोन: 9910344787, 8585913486

email: samvadoffbeat@yahoo.co.in
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संजय ग्रोवर Sanjay Grover  को कॉपी करके गूगल या किसी भी अन्य सर्च में डालकर खोजेंगे तो बेहतर परिचय जान पाएंगे।

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Additional Information

Publisher
Sanjay Grover/संजय ग्रोवर
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Published on
Nov 6, 2016
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Pages
81
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Language
Hindi
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Genres
Poetry / General
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 नाराज़ राहत इंदौरी राहत की पहचान के कई हवाले हैं - वो रंगों और रेखाओं के फनकार भी हैं, कॉलेज में साहित्य के उस्ताद भी, मक़बूल फिल्म के गीतकार भी हैंऔर हर दिल अज़ीज़ मशहूर शायर भी है I इन सबके साथ राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में इंसान की अंदरुनी और बाहरी कश्मकश के प्रत्यक्षदर्शी भी हैं I राहत की शख़्सियत के तमाम पहलू उनकी ग़ज़ल के संकेतों और प्रतीकों में छलकते हैं I उनकी शायरी की सामूहिक प्रकृति विद्रोही और व्यंगात्मक है, जो सहसा ही परिस्तिथियों का ग़ज़ल के द्वारा सर्वेक्षण और विश्लेषण भी है I राहत की शायरी की भाषा भी उनके विचारों की तरह सूफ़ीवाद का प्रतिबिंब है I प्रचारित शब्दावली और अभिव्यक्ति की प्रचलित शैली से अलग अपना रास्ता बनाने के साहस ने ही राहत के सृजन की परिधि बनाई है I निजी अवलोकन और अनुभवों पर विश्वास ही उनके शिल्प की सुंदरता और उनकी शायरी की सच्चाई है I - निदा फाज़ली
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