ई-रीडर पर मेरी कुण्डलिनी वैबसाइट

Bhishm Sharma · AI-narrated by Harish (from Google)
Audiobook
2 hr 35 min
Unabridged
AI-narrated
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About this audiobook

यह पुस्तक "demystifyingkundalini.com" वेबसाइट बनाते समय वेबसाइट खोजकर्ताओं के दिमाग की उपज है।

वेबसाइट निर्माता को संदेह होने लगा कि यदि दुर्भाग्यवश किसी कारण से वेबसाइट खराब हो गई, तो सारी मेहनत खराब हो जाएगी, और लिखा हुआ सारा पाठ चला जाएगा। इसके अलावा, वेबसाइट निर्माता ने यह भी चाहा है कि वेबसाइट हर किसी ई-रीडर पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि पाठक पढ़ने में सहज हो, और आँखें प्रभावित न हों। इन दोनों उद्देश्यों को वेबसाइट की ई-बुक बनाकर ही पूरा किया जा सकता था। इसलिए स्थिर वेब पेज और कुछ वेब पोस्ट जो अन्य ई-बुक में शामिल नहीं थे, इस ई-बुक में शामिल किया गया।

एक अन्य ई-बुक में कुंडलिनी से संबंधित सभी वेब पोस्ट डाले गए थे, जिसमें सभी शेष सामग्री आ गयी थी। उस अन्य पुस्तक का नाम "कुंडलिनी विज्ञान- एक आध्यात्मिक मनोविज्ञान" है। इस वेबसाइट के पहले दो होम पेजों को अभी भी एक अन्य पुस्तक में शामिल किया गया है, "कुंडलिनी रहस्योद्घाटित- प्रेमोगी वज्र क्या कहता है"।

तंत्र व कुण्डलिनी का जैसा स्पष्ट, सरल, सत्य, स्वाभाविक, व्यावहारिक और वैज्ञानिक वर्णन प्रेमयोगी वज्र द्वारा किया गया है, वैसा वर्णन अन्य किसी स्थान पर दृष्टिगोचर नहीं होता।

About the author

प्रेमयोगी वज्र का जन्म वर्ष 1975 में भारत के हिमाचल प्रान्त की वादियों में बसे एक छोटे से गाँव में हुआ था। वह स्वाभाविक रूप से लेखन, दर्शन, आध्यात्मिकता, योग, लोक-व्यवहार, व्यावहारिक विज्ञान और पर्यटन के शौक़ीन हैं। उन्होंने पशुपालन व पशु चिकित्सा के क्षेत्र में भी प्रशंसनीय काम किया है। वह पोलीहाऊस खेती, जैविक खेती, वैज्ञानिक और पानी की बचत युक्त सिंचाई, वर्षाजल संग्रहण, किचन गार्डनिंग, गाय पालन, वर्मीकम्पोस्टिंग, वैबसाईट डिवेलपमेंट, स्वयंप्रकाशन, संगीत (विशेषतः बांसुरी वादन) और गायन के भी शौक़ीन हैं। लगभग इन सभी विषयों पर उन्होंने दस के करीब पुस्तकें भी लिखी हैं, जिनका वर्णन एमाजोन ऑथर सेन्ट्रल, ऑथर पेज, प्रेमयोगी वज्र पर उपलब्ध है। इन पुस्तकों का वर्णन उनकी निजी वैबसाईट demystifyingkundalini.com पर भी उपलब्ध है। वे थोड़े समय के लिए एक वैदिक पुजारी भी रहे थे, जब वे लोगों के घरों में अपने वैदिक पुरोहित दादा जी की सहायता से धार्मिक अनुष्ठान किया करते थे। उन्हें कुछ उन्नत आध्यात्मिक अनुभव (आत्मज्ञान और कुण्डलिनी जागरण) प्राप्त हुए हैं। उनके अनोखे अनुभवों सहित उनकी आत्मकथा विशेष रूप से “शरीरविज्ञान दर्शन- एक आधुनिक कुण्डलिनी तंत्र (एक योगी की प्रेमकथा)” पुस्तक में साझा की गई है। यह पुस्तक उनके जीवन की सबसे प्रमुख और महत्त्वाकांक्षी पुस्तक है। इस पुस्तक में उनके जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण 25 सालों का जीवन दर्शन समाया हुआ है। इस पुस्तक के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की है। एमाजोन डॉट इन पर एक गुणवत्तापूर्ण व निष्पक्षतापूर्ण समीक्षा में इस पुस्तक को पांच सितारा, सर्वश्रेष्ठ, सबके द्वारा अवश्य पढ़ी जाने योग्य व अति उत्तम (एक्सेलेंट) पुस्तक के रूप में समीक्षित किया गया है। गूगल प्ले बुक की समीक्षा में भी इस पुस्तक को फाईव स्टार मिले थे, और इस पुस्तक को अच्छा (कूल) व गुणवत्तापूर्ण आंका गया था। प्रेमयोगी वज्र एक रहस्यमयी व्यक्ति है। वह एक बहुरूपिए की तरह है, जिसका अपना कोई निर्धारित रूप नहीं होता। उसका वास्तविक रूप उसके मन में लग रही समाधि के आकार-प्रकार पर निर्भर करता है, बाहर से वह चाहे कैसा भी दिखे। वह आत्मज्ञानी (एनलाईटनड) भी है, और उसकी कुण्डलिनी भी जागृत हो चुकी है। उसे आत्मज्ञान की अनुभूति प्राकृतिक रूप से / प्रेमयोग से हुई थी, और कुण्डलिनी जागरण की अनुभूति कृत्रिम रूप से / कुण्डलिनी योग से हुई। प्राकृतिक समाधि के समय उसे सांकेतिक व समवाही तंत्रयोग की सहायता मिली, जबकि कृत्रिम समाधि के समय पूर्ण व विषमवाही तंत्रयोग की सहायता उसे उसके अपने प्रयासों के अधिकाँश योगदान से प्राप्त हुअधिक जानकारी के लिए, कृपया निम्नांकित स्थान पर देखें-

https://demystifyingkundalini.com/ई।



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