यह पागलपन नही तो और क्या है ?
न किसीसे लोकार्पण कराता हूं, न किसीसे पब्लिसिटी कराता हूं, न बदनामी की, अफ़वाहों की, विज्ञापनों की, टीवी की, फ़िल्मों की चिंता करता हूं.....
यह पागलपन नही तो और क्या है ?
फिर भी आप पढ़ते हैं, यह ......... नही तो और क्या है ;)
आप तो यहीं हंसने लगे, अंदर भी बहुत कुछ है-
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
(पागलखाने के सभी पागलों को समर्पित)
पागलों से मिलने के लिए नीचे के दो लिंकों पर जाईए-
1.
http://paagal-khaanaa.blogspot.com/
2.
https://www.facebook.com/groups/PaagalBachchePaagalAchchhe/
ABOUT the AUTHER लेखक के बारे में
ʘ SANJAY GROVER संजय ग्रोवर :
ʘ सक्रिय ब्लॉगर व स्वतंत्र लेखक.
ʘ Active Blogger and Freelance Writer.
ʘ मौलिक और तार्किक चिंतन में रुचि.
ʘ Inclined towards original and logical thinking.
ʘ नये विषयों, नये विचारों और नये तर्कों के साथ लेखन.
ʘ loves writing on new subjects with new ideas and new arguments.
ʘ फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी सक्रिय.
ʘ Also active on Facebook and Twitter.
ʘ पत्र-पत्रिकाओं में कई व्यंग्य, कविताएं, ग़ज़लें, नारीमुक्ति पर लेख आदि प्रकाशित.
ʘ Several satires, poems, ghazals and articles on women's lib published in various journals.
ʘ बाक़ी इन लेखों/व्यंग्यों/ग़जलों/कविताओं/
ʘ Rest learn by these articles/satires/ghazals/
ʘ blogs : www.samwaadghar.blogspot.com
ʘ email : sanjay.grover01@gmal.com