Aalasya se Mukti ke 7 Kadam: Utsahit Jeevan Sandesh

WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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शरीर के लिए तम (आलस्य) आवश्यक है मगर इसकी अधिकता इंसान की अभिव्यक्ति में बाधा बन जाती है।

आलस्य एक ऐसा विकार है, जो इंसान की बाकी सभी खूबियों पर भारी पड़ जाता है। इसके दुष्प्रभाव में आकर एक अच्छे से अच्छा कलाकार, रचनाकार, काबिल इंसान भी जीवनभर असफलता का मुँह देखता है।

इस पुस्तक के द्वारा आपको अपने ही भीतर छिपकर बैठे बड़े दुश्मन के बारे में चेताया जा रहा है। इसे पहचानें और अपने भीतर से खोज कर, इसे बाहर निकाल फेंकें। इस बड़े कार्य को करने के लिए यह पुस्तक 7 संकेतों, 7 कदमों, 7 दिशाओं और 13 उपायों द्वारा आपका हर तरह से मार्गदर्शन करेगी।

तो आइए, इस पुस्तक रूपी हथियार की मदद से आलस्य को दूर भगाएँ और इस कार्य में सुस्ती बिलकुल न करें।
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About the author

सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था| इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया| इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया| उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया| इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे| उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें| जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी| जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ| आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अण्डरस्टैण्डिंग)|

सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है| ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है| आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है|’

सरश्री ने दो हजार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सत्तर से अधिक पुस्तकों की रचना की है| ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल ऍण्ड सन्स इत्यादि|
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Additional Information

Publisher
WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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Published on
Aug 16, 2016
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Pages
144
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ISBN
9788184155464
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Language
Hindi
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Genres
Body, Mind & Spirit / General
Self-Help / General
Self-Help / Spiritual
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Content Protection
This content is DRM protected.
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Available on Android devices
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Sirshree
 दो जादूई शक्तियाँ

‘विचार नियम’... सरश्री के अनमोल कलम से आविष्कृत हुआ अनुपम पुस्तक! लाखों लोगों के जीवन में क्रांति लानेवाला ग्रंथ| इस पुस्तिका में संक्षिप्त में दिए गए सात विचार सूत्र और क्षमा साधना के सात कदम आपको सच्ची सफलता के शिखर पर पहुँचाएँगे|

आज ‘विचार नियम’ पुस्तक का लाभ लेनेवाला हर इंसान प्रेम, आनंद, शांति, समृद्धि और संतुष्टि का वरदान प्राप्त कर रहा है| ‘विचार नियम’ इस विषय के साथ उतना ही दूसरा महत्वपूर्ण विषय यानी सभी बंधनों से मुक्त करनेवाली ‘क्षमा साधना’| इन दोनों विषयों के लगभग सभी पहलू सरश्री ने अनेक प्रवचनों के माध्यम से प्रकाशित किए हैं| प्रस्तुत पुस्तिका इन दो विषयों के विस्तार का सार है|

लक्ष्य चाहे सफल सांसारिक जीवन जीना हो या मोक्ष प्राप्ति, विचारों का विज्ञान जाने बिना इंसान कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता और क्षमा साधना के बिना दुःखदायी भावनाओं से मुक्त नहीं हो सकता| अतः जिसे सर्वोच्च आनंद चाहिए, उसके पास हमेशा यह पुस्तिका होनी चाहिए| तो क्या आप जीवन के सभी स्तरों पर विचार नियम और क्षमा का जादू देखने के लिए तैयार हैं? यदि ‘​हाँ’ तो पुस्तिका के अंदर पढ़ें - सुखी जीवन के सात कदम|

Tejgyan Global Foundation
 मानव जीवन का असली लक्ष्य है "अपना सत्य'' ढूँढ़ना जो शरीर, मन, बुद्धि के परे है। ...जो अपना होना, चेतना (Consciousness) की पहचान है, जो असली "मैं' है...जो असीम है, जो व्यक्तिगत अहंकार से परे है। वह ब्रह्माण्डीय यानी अव्यक्तिगत मैं' (Universal ''I'') है, जहॉं सभी के "एक' होने (एकात्मता और समग्रता ) का अनुभव है। असली अनुभव, जो शरीर और मन के परे का अनुभव है, उसका सिर्फ संकेत किया जा सकता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। कहानियॉं केवल संकेत देती हैं।

वैसे तो हर महापुरुष का पूर्ण जीवन जानने और मनन करने योग्य है परंतु इस पुस्तक में कुछ महापुरुषों के जीवन से जुड़ी एक-एक घटना का समावेश किया गया है। ये घटनाएँ हमें कुछ न कुछ ऐसा सीखाकर जाएँगी, जिसकी जरूरत हमें आज है, अभी है और आपके हाथ में है।
Sirshree
 सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यानपद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद वे अंतिम सत्य से दूर रहे।

उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य पर भी विराम लगाया, ताकि वे अपना अधिकसेअधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है, वह है—समझ (अंडरस्टैंडिंग)।

सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलगअलग प्रकार से होती है, लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सबकुछ है और यह ‘समझ’ अपने आप में पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।

Sirshree
 लोग असली जीवन भूल गए हैं, वे डुप्लीकेटी से ही काम चलाते हैं। जैसे एक इनसान गलती से अपने घर की चाभी निगल गया, लेकिन एक महीने के बाद डॉक्टर के पास गया और कहा, ‘मैं अपने घर की चाभी निगल गया हूँ, उसे निकलवाना है।’ डॉक्टर ने पूछा, ‘आपने चाभी कब निगली थी?’ उसने जवाब दिया, ‘एक महीना पहले।’

उस इनसान का यह जवाब सुनकर डॉक्टर हैरान रह गया और पूछा, ‘फिर आप अभी चाभी निकलवाने के लिए क्यों आए हैं? इतने दिन कैसे रहे?’ उसने जवाब दिया, ‘अब तक तो मैं अपनी डुप्लीकेट (नकली) चाभी से काम चला रहा था, लेकिन आज वह भी खो गई है, इसलिए तो ऑरिजनल (असली) चाभी निकलवाने के लिए आपके पास आया 

हूँ। आज ऑरिजनल चाभी की जरूरत पड़ी है।’

यदि इस चुटकुले को समझा जाए तो इसमें गहरी समझ छिपी है। चुटकुलेवाले इनसान पर तो हम आसानी से हँस लेते हैं, परंतु हम अपने जीवन में भी ऐसी गलती करते हैं। असली आनंद अंदर है, लेकिन लोग डुप्लीकेट आनंद से काम चलाते रहते हैं। जब वह आनंद भी खो जाता है तब वे सोचते हैं कि ‘चलो अभी सत्संग में चलते हैं, वहाँ कुछ तो मिलेगा।’

ऑरिजनल चाभी पाने के लिए आपको पहले चाहिए सोचने की तरकीब। तरकीब है थोड़ा सोचें, अच्छा सोचें। आइए, इस तरकीब का उपयोग सीखने के लिए कुछ करें। सोचने की यह तरकीब आपको इस पुस्तक द्वारा प्राप्त होगी।

Sirshree
 हर इनसान की मूल चाहत है स्वयं को जानना किंतु अहंकार, अज्ञान, अध्यान और अनजाने में उसके अंदर ऐसी चाहतें उभरकर आती हैं, जिनकी कोई सच्ची बुनियाद नहीं है। अनगिनत और अनावश्यक इच्छाओं के भँवर में फँसकर इनसान का जीवन किस ओर जा रहा है, यह वह देख ही नहीं पा रहा है। मान्यता और माया के शिकंजे में उसके जीवन की क्वालिटी समाप्त होती जा रही है।

इस पुस्तक द्वारा आप में ऐसी जागृति लाई जा रही है, जिससे आपका होश इतनी ऊँचाई पर जाए कि सूक्ष्मसेसूक्ष्म इच्छा भी आपकी पकड़ में आए। इसके लिए आपको प्रेरणा पानी है एक चिडि़या से।

जिस तरह चिडि़या एकएक तिनका चुनकर अपना आशियाना बनाती है, उसी तरह आपको भी अपनी एकएक इच्छा के साथ खोज कर, उसके पीछे छिपी मान्य कथा को मिटाना है। ऐसे में जो शरीर रूपी आशियाना बनेगा, वह सेल्फ के लिए वाकई ध्यानकक्ष, मौनकक्ष, अभिव्यक्ति कक्ष, दर्पणकक्ष, एग्जीबीशन कक्ष होगा, जिसमें केवल आनंदहीआनंद होगा। शुभ इच्छा पूरी होने का आनंद!

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