Organic Anubhav: Surfing The Self

WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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सत्य क्या है...? असत्य का दूसरा पहलू...! मात्र भ्रम...! या कुछ और...! जो दिखाई दे रहा है, क्या वह सत्य है? या फिर सत्य दिखाई नहीं देता?
आज जिसे हम सुख कहते हैं, कल वही गले का फंदा बन जाता है। आज जो नापसंद है, कल वही पसंद आने लगता है। क्या सत्य क्षणिक है? क्या हर क्षण का सत्य अलग-अलग है? क्या समय को "सत्य' कहा जा सकता है? लेकिन वह भी तो हर पल बदलता रहता है। जिसे हम सत्य समझते आए, कहीं वह मन का खेल तो नहीं? क्या यही सत्य है कि कुछ भी सत्य नहीं? फिर... शाश्वत सत्य क्या है? क्या शाश्वत सत्य का अनुभव हो सकता है?
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About the author

Sirshree’s spiritual quest, which began right from his childhood, led him on a journey through various schools of thought and meditation practices. The overpowering desire to attain the truth made him relinquish his teaching job. After a long period of contemplation, his spiritual quest ended with the attainment of the ultimate truth. Sirshree says, “All paths that lead to the truth begin differently, but end in the same way—with understanding. Understanding is the whole thing. Listening to this understanding is enough to attain the truth. This understanding begins with the mantra of acceptance. The mantra of acceptance is: Can I accept this?”

To disseminate this understanding, Sirshree devised Tejgyan—a unique system for wisdom—that helps one to progress from self-help to self-realization. He has delivered more than 1500 discourses and written over 60 books. His books have been translated in more than ten languages and published by leading publishers such as Penguin Books, Hay House Publishers, Jaico Books, etc. Sirshree’s retreats have transformed the lives of thousands of people and his teachings have inspired various social initiatives for raising global consciousness.

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4.6
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Additional Information

Publisher
WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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Published on
Jun 5, 2014
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Pages
200
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ISBN
9788184152524
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Language
Hindi
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Genres
Body, Mind & Spirit / General
Self-Help / Spiritual
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Content Protection
This content is DRM protected.
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हम अपना जीवन यूँ ही गुजार देने के लिए नहीं आए हैं बल्कि कुल-मूल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें जीवन मिला है। कुल-मूल लक्ष्य यानी पृथ्वी लक्ष्य। इसे प्राप्त करने के लिए सत्य की प्यारी खोज अनिवार्य शर्त है। जिस प्रकार समुद्री सीप को मोती पाने के लिए, हंस को उस मोती को चुगने के लिए और चातक को प्यास बुझाने के लिए सिर्फ बारिश की बूँदों का इंतजार रहता है। उसी प्रकार ज्ञान से परे तेजज्ञान को प्राप्त करने के लिए ऐसे ही त्याग की अपेक्षा की जाती है। यह तेजज्ञान निराकार की अनुभूति से प्राप्त होता है। प्रेम, आनंद और मौन की अभिव्यक्ति ही निराकार के गुण हैं।

इस पुस्तक में इसी विषय को केंद्रित कर अज्ञानता के पथ पर भटके लोगों को कुल-मूल लक्ष्य की प्राप्ति का मार्ग दिखाया गया है। मुख्य रूप से पॉंच खण्डों में विभक्त इस पुस्तक द्वारा निराकार के आकार से लेकर महाशून्य, स्वज्ञान की विधि तथा ब्रह्माण्ड के खेल तक पाठकों को विचरण कराया गया है।

इस पुस्तक के नियमित अध्ययन से निराकार की संतुलित समझ और समर्पण तथा संकल्प की भावना मजबूत होती है। सरश्री के प्रवचनों का यह संकलन समझ (प्रज्ञा) की शक्ति जाग्रत करने की एक सफल कुंजी है।
 मानव जीवन का असली लक्ष्य है "अपना सत्य'' ढूँढ़ना जो शरीर, मन, बुद्धि के परे है। ...जो अपना होना, चेतना (Consciousness) की पहचान है, जो असली "मैं' है...जो असीम है, जो व्यक्तिगत अहंकार से परे है। वह ब्रह्माण्डीय यानी अव्यक्तिगत मैं' (Universal ''I'') है, जहॉं सभी के "एक' होने (एकात्मता और समग्रता ) का अनुभव है। असली अनुभव, जो शरीर और मन के परे का अनुभव है, उसका सिर्फ संकेत किया जा सकता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। कहानियॉं केवल संकेत देती हैं।

वैसे तो हर महापुरुष का पूर्ण जीवन जानने और मनन करने योग्य है परंतु इस पुस्तक में कुछ महापुरुषों के जीवन से जुड़ी एक-एक घटना का समावेश किया गया है। ये घटनाएँ हमें कुछ न कुछ ऐसा सीखाकर जाएँगी, जिसकी जरूरत हमें आज है, अभी है और आपके हाथ में है।
नींव यानी जड़ या आधार। अगर किसी मकान की नींव कमजोर होगी तो उसे धराशाई होने में देर नहीं लगेगी। उसी प्रकार यदि इंसान के चरित्र या अंत:करण की नींव मजबूत नहीं है तो उसका पतन निश्चित ही है।

इस पुस्तक में इंसान की तुलना एक पुस्तक से की गई है। जिस प्रकार 10 प्रतिशत कवर और 90 प्रतिशत पृष्ठों से निर्मित एक पुस्तक की सार्थकता अंदर के पृष्ठों में दी गई जानकारी से प्रमाणित होती है, ठीक वैसे ही इंसान का बाह्य रूप (10%) उसके अंत:करण (90%) की सार्थकता से ही स्पष्ट होता है। इसी विषय पर केंद्रित सरश्री की पुस्तक "नींव नाइन्टी' पाठकों के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर है। पुस्तक में संपूर्ण चरित्र सौगात का सूत्र निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त नींव नाइन्टी मजबूत करने के सभी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। जिससे पाठक अपने मानसिक, बौद्धिक, शारीरिक और आध्यात्मिक परिपक्वता को नया आयाम देकर समाज तथा देश के लिए प्रेरणा की जीवंत मिसाल बन सकते हैं।

पुस्तक का मूल उद्देश्य पाठकों के अंदर छिपे सद्गुणों को विकसित कराना है, जिससे वे पृथ्वी लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर सकें। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए पुस्तक में महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, विवेकानंद और संत तुकाराम जैसे महापुरुषों और विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं का हवाला दिया गया है। पुस्तक में हर बात इतनी बारीकी से समझाई गई है कि पाठक आसानी से इसका लाभ लेकर अपना और औरों का जीवन सार्थक कर सकते हैं। 
 निराशा की ओर से आशा के प्रति समर्पण'यदि आप इस वर्ष केवल एक ही पुस्तक पढ़ना चाहते हों, तो निश्चित तौर पर वह पुस्तक डॉक्टर फ्रैंकल की ही होनी चाहिए।'
-लॉस एंजेलिस टाइम्स

मैंस सर्च फ़ॉर मीनिंग, होलोकास्ट से निकली एक अद्भुत व उल्लेखनीय क्लासिक पुस्तक है। यह विक्टर ई. फ्रैंकल के उस संघर्ष को दर्शाती है, जो उन्होंने ऑश्विज़ तथा अन्य नाज़ी शिविरों मे जीवित रहने के लिए किया। आज आशा को दी गई यह उल्लेखनीय श्रद्धांजलि हमें हमारे जीवन का महान अर्थ व उद्देष्य पाने के लिए एक मार्ग प्रदान करती है। विक्टर ई. फ्रैंकल बीसवीं सदी के नैतिक नायकों में से हैं। मानवीय सोच, गरिमा तथा अर्थ की तलाश से जुड़े उनके निरीक्षण गहन रूप से मानवता से परिपूर्ण हैं और उनमें जीवन को रूपांतिरत करने की अद्भुत क्षमता है।

-प्रमुख रब्बी, डॉक्टर जोनाथन सेक
प्राकृतिक जीवन संजीवनी

प्रस्तुत पुस्तक में स्वस्थ जीवन के तीन वरदानों को एफ. टी. त्रिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिनकी उपयोगिता और स्वाभाविकता को संक्षिप्त में जानें और अपनाएँ प्राकृतिक जीवन संजीवनी।

यु.एफ.टी.(युरिन फास्ट थेरेपी) : शिवाम्बु उपचार पध्दति सदियों पुरानी है। अपने शारीरिक स्वास्थ के प्रति सजक होने के बाद से इंसान ने जिन विविध उपचारों की खोज की, उनमें से एक शिवाम्बु (यु.एफ.टी.) उपचार पध्दति भी है। इसमें रोग के लक्षण के अनुसार इलाज नही किया जाता बल्कि रोग के कारणों को दुरूस्त किया जाता है। इसलिए इसमें रोग के नामकरण को ज्यादा महत्व नही दिया जाता।

बी.एफ.टी. (बॅच फ्लॉवर थेरेपी) : कारण को हटा देने से रोग अपने आप हट जाते है। कारण हैं मन के सूक्ष्म विकार और कारण मिटाने में मदद करती है बी.एफ.टी.। जैसे अच्छे कर्मों का फल आनंद देता है, वैसे ही 38 फूलों का फल मानसिक स्वास्थ्य देता है। मानवीय स्वभाव के सारे दोषों तथा उनसे प्रकट होनेवाली तकलीफों के लिए बी.एफ.टी. उपचार का काम करता है। इसे सभा उम‘ के लोग ले सकते है।

ई.एफ.टी. (इमोशनल फि‘डम टेक्नीक) : भावना मुक्ति तकनीक यह एक तरह से मानसिक एक्युपंचर तकनीक है, जो शरीर में स्थित ऊर्जा रेखाओें (energy meridians) पर आधारित है। ई.एफ.टी. में शरीर के कुछ बिंदुओं पर हल्के हाथों से थपथपाकर असंतुलित ऊर्जा को संतुलित किया जाता है। यह एक बहुत ही आसान तरीका है और इसके परिणाम बडे प्रभावकारी और तुरंत दिखाई देनेवाले होते है।
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