Parivar Ke Liye Vichar Niyam: Happy Family Ke Saat Sutra

WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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सरल नियम, आश्‍चर्यजनक नतीजे

‘विश्‍व की हर बड़ी सफलता रिश्ते-नातों और सहयोगियों के सहयोग से ही पाई जा सकती है।’ क्या आप इस विचार से सहमत हैं? यदि ‘हाँ’ तो प्रस्तुुत पुस्तक आपको लोगों का सहयोग प्राप्त करना सिखाएगी। इतना ही नहीं बल्कि आपके परिवार की सर्वोच्च संभावनाएँ खोलेगी।

प्रेम, आनंद, विश्‍वास, शांति, मिठास और स्वस्थ संवादमंच जैसे अनेक सकारात्मक पहलू आपके परिवार की नींव बन सकते हैं। बशर्ते परिवार के लिए अत्यंत परिणामकारक होनेवाले ‘विचार नियम’ जानकर, उन्हें अमल में लाया जाए। ये नियम बहुत ही सरल हैं मगर वे आश्‍चर्यजनक परिणाम दे सकते हैं।

इस पुस्तक में पढ़ें -
- कैसे बने आपके विचारों का परिवार पर होनेवाला असर असरदार
- कैसे हो विचारों को दिशा देकर आनंदित परिवार का निर्माण
•- कैसे तैयार हो स्वस्थ परिवार के लिए - ‘पावर हाउस’
•- परिवार में प्रेम, आनंद, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और संतुष्टि आकर्षित करने का रहस्य
•- नकारात्मक विचार करनेवाले लोगों से अपने परिवार की रक्षा करने की युक्ति
•- वार्तालाप से परिवार को स्वर्ग बनाने का राज़
•- क्षमा, खोज और कृतज्ञता की शक्ति से रिश्तों में पूर्णता लाने का उपाय

अगर आप अपने परिवार में आश्‍चर्यजनक बदलाव देखना चाहते हैं तो सात विचार नियमों और उपायों को अपनी ज़िंदगी में लागू करना शुरू कीजिए और देखिए आप जो भी चाहें, वह हासिल कर सकते हैं!
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About the author

सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे।

उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अंडरस्टैण्डिंग)।

सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’

सरश्री ने ढाई हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की हैं। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल अ‍ॅण्ड सन्स इत्यादि।

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Additional Information

Publisher
WOW PUBLISHINGS PVT LTD
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Published on
Sep 27, 2016
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Pages
168
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ISBN
9788184155457
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Language
Hindi
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Genres
Self-Help / General
Self-Help / Spiritual
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Content Protection
This content is DRM protected.
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Available on Android devices
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केवल एक जवाब

सुनहरे नियम से रिश्ते बाँधे 

परिवार में सभी एक-दूसरे के शुभचिंतक होते हैं लेकिन फिर भी सदस्यों के बीच झगड़े क्यों होते हैं?घर में सब एक-दूसरे का भला चाहते हैं, फिर भी एक-दूसरे के प्रति मनमुटाव क्यों हो जाता है? यह आश्चर्य की बात है।

हर कोई चाहता है कि परिवार में सुख-शांति हो, फिर भी ऐसा नहीं होता, क्यों? क्या कारण है?क्या आपके पास इन सबका एक जवाब है? इसका सही जवाब मिलेगा आपको इस सुनहरी पुस्तक में। 

जब इंसान परिवार को सुनहरे नियम के धागे से सीता है तो रावण उस परिवार का कोई नुकसान नहीं कर पाता है। सुनहरे नियम से यदि हम हर रिश्ते को बॉंधेंगे तो कोई गैर इंसान, समस्या या रोग हमारे परिवार को खण्डित नहीं कर पाएगा।

“सुनहरा नियम’ प्रेम का सच्चा धागा है, जो आपसी विश्वास को बॉंधने में आपकी मदद करेगा।परिवार का उपहार, जो ईश्वर ने आपको दिया है, उसे क्यों न सुनहरे नियम के ज्ञान से आज ही खोलें। पुस्तक खोलें।लोगों के साथ ऐसा व्यवहार करें, जैसा आप चाहते हैं कि लोग आपसे जो आप हैं, वह जानकर व्यवहार करें’.

 मानव जीवन का असली लक्ष्य है "अपना सत्य'' ढूँढ़ना जो शरीर, मन, बुद्धि के परे है। ...जो अपना होना, चेतना (Consciousness) की पहचान है, जो असली "मैं' है...जो असीम है, जो व्यक्तिगत अहंकार से परे है। वह ब्रह्माण्डीय यानी अव्यक्तिगत मैं' (Universal ''I'') है, जहॉं सभी के "एक' होने (एकात्मता और समग्रता ) का अनुभव है। असली अनुभव, जो शरीर और मन के परे का अनुभव है, उसका सिर्फ संकेत किया जा सकता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। कहानियॉं केवल संकेत देती हैं।

वैसे तो हर महापुरुष का पूर्ण जीवन जानने और मनन करने योग्य है परंतु इस पुस्तक में कुछ महापुरुषों के जीवन से जुड़ी एक-एक घटना का समावेश किया गया है। ये घटनाएँ हमें कुछ न कुछ ऐसा सीखाकर जाएँगी, जिसकी जरूरत हमें आज है, अभी है और आपके हाथ में है।
नींव नाइन्टी + टॉप टेन + छिपा शून्य = १००% आदर्श जीवन

एक ‘सुखी, सफल और आदर्श जीवन’ जीना ऐसा सपना है जिसे आप आज के समय में भी हकीकत में बदल सकते हैं, बस जरुरत है कुदरत के अटल विचार – नियमों को जानकार उसे जीवन में उतारने की। यह पुस्तक आपको यही कला सिखाती है। इसे पढ़कर आप जानेंगे –

* विचार नियमों को अपनाकर सफलता के लिए जरुरी आदर्श गुणों (विश्वसनीयता, मैच्युरिटी, निरंतरता इत्यादि) का विकास कैसे करें?
* अपने विकास के लिए सही संघ का चुनाव क्यों और कैसे करें?
* आपके जीवन में टॉप तेन (बाहरी पर्सनैलिटी) की असली भूमिका क्या है, इसका सही लाभ कैसे लें?
* आपके अंदर छिपा वह ‘शून्य’ क्या है जिसे अनुभव से जानने के बाद आप अपने जीवन का उच्चतम लक्ष्य पा सकते हैं?

आइए, इन रहस्यों को जानकार अपने जीवन को ‘सुखी, सफल, आदर्श जीवन’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।
 निराशा की ओर से आशा के प्रति समर्पण'यदि आप इस वर्ष केवल एक ही पुस्तक पढ़ना चाहते हों, तो निश्चित तौर पर वह पुस्तक डॉक्टर फ्रैंकल की ही होनी चाहिए।'
-लॉस एंजेलिस टाइम्स

मैंस सर्च फ़ॉर मीनिंग, होलोकास्ट से निकली एक अद्भुत व उल्लेखनीय क्लासिक पुस्तक है। यह विक्टर ई. फ्रैंकल के उस संघर्ष को दर्शाती है, जो उन्होंने ऑश्विज़ तथा अन्य नाज़ी शिविरों मे जीवित रहने के लिए किया। आज आशा को दी गई यह उल्लेखनीय श्रद्धांजलि हमें हमारे जीवन का महान अर्थ व उद्देष्य पाने के लिए एक मार्ग प्रदान करती है। विक्टर ई. फ्रैंकल बीसवीं सदी के नैतिक नायकों में से हैं। मानवीय सोच, गरिमा तथा अर्थ की तलाश से जुड़े उनके निरीक्षण गहन रूप से मानवता से परिपूर्ण हैं और उनमें जीवन को रूपांतिरत करने की अद्भुत क्षमता है।

-प्रमुख रब्बी, डॉक्टर जोनाथन सेक
प्राकृतिक जीवन संजीवनी

प्रस्तुत पुस्तक में स्वस्थ जीवन के तीन वरदानों को एफ. टी. त्रिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिनकी उपयोगिता और स्वाभाविकता को संक्षिप्त में जानें और अपनाएँ प्राकृतिक जीवन संजीवनी।

यु.एफ.टी.(युरिन फास्ट थेरेपी) : शिवाम्बु उपचार पध्दति सदियों पुरानी है। अपने शारीरिक स्वास्थ के प्रति सजक होने के बाद से इंसान ने जिन विविध उपचारों की खोज की, उनमें से एक शिवाम्बु (यु.एफ.टी.) उपचार पध्दति भी है। इसमें रोग के लक्षण के अनुसार इलाज नही किया जाता बल्कि रोग के कारणों को दुरूस्त किया जाता है। इसलिए इसमें रोग के नामकरण को ज्यादा महत्व नही दिया जाता।

बी.एफ.टी. (बॅच फ्लॉवर थेरेपी) : कारण को हटा देने से रोग अपने आप हट जाते है। कारण हैं मन के सूक्ष्म विकार और कारण मिटाने में मदद करती है बी.एफ.टी.। जैसे अच्छे कर्मों का फल आनंद देता है, वैसे ही 38 फूलों का फल मानसिक स्वास्थ्य देता है। मानवीय स्वभाव के सारे दोषों तथा उनसे प्रकट होनेवाली तकलीफों के लिए बी.एफ.टी. उपचार का काम करता है। इसे सभा उम‘ के लोग ले सकते है।

ई.एफ.टी. (इमोशनल फि‘डम टेक्नीक) : भावना मुक्ति तकनीक यह एक तरह से मानसिक एक्युपंचर तकनीक है, जो शरीर में स्थित ऊर्जा रेखाओें (energy meridians) पर आधारित है। ई.एफ.टी. में शरीर के कुछ बिंदुओं पर हल्के हाथों से थपथपाकर असंतुलित ऊर्जा को संतुलित किया जाता है। यह एक बहुत ही आसान तरीका है और इसके परिणाम बडे प्रभावकारी और तुरंत दिखाई देनेवाले होते है।
मन सताए तो क्या करें

विज्ञान की मदद से विश्व में आज तक कई चमत्कार देखे गए हैं और कई चमत्कारों पर संशोधन जारी भी है। किंतु क्या कभी आपने आदर्श और प्रशिक्षित मन का चमत्कार देखा है? अगर नहीं तो यह पुस्तक आपके लिए है। हर कल्पना से परे विश्व का सबसे बड़ा चमत्कार आदर्श तथा प्रशिक्षित मन के साथ ही हो सकता है, यह ‘मन का विज्ञान’ इस पुस्तक द्वारा जान लें और जब मन सताए तब नीचे दी गई बातों पर महारत हासिल करें।

* मन क्या है, मन के भिन्न पहलू कौन से हैं और मन के बुद्ध कैसे बनें
* विचारों और भावनाओं द्वारा मन किस तरह सच पर हावी हो जाता है
* सरल उपमाओं द्वारा जानें मन की कार्यपद्धति
* मन के विकार और उनसे आज़ादी का मार्ग
* मन की सारी नकारात्मक आदतों से छुटकारा पाने के रचनात्मक तरीके
* मन को आदर्श बनाने का उद्देश्य और पद्धति
* मनोरंजन में मन कैसे उलझता है और उससे मुक्ति के उपाय
* मन के नाटक होते हैं अनेक, उनसे छुटकारा पाने के तरीके भी हैं अनेक
* मन के बुद्ध बनने के लिए आवश्यक आठ कदम

इस पुस्तक द्वारा आप सुप्त मन के अनोखे रूप से परिचित होंगे तथा मन के बुद्ध बनने का राजमार्ग जान पाएँगे, जो हमें मन सताने से पहले सीख लेना चाहिए।

 

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