विदशी रानी: ऐतिहासिक कहानी-संग्रह

Suruchi Prakashan
203

The way author of the book has presented the history touches
the heart. The way he the nuances of distinct Indian languages viz. Haryanavi,
Braj, aavdhi and Mughal Tahzib is wonderful. Every reader could connect himself
with the adventurous stories. Author has researched rigorously on Indian
languages and that gives a realistic hue to the stories in the book.   

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4.3
203 total
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Additional Information

Publisher
Suruchi Prakashan
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Published on
Jul 1, 2013
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Pages
284
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ISBN
9788189622916
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Best For
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Language
Hindi
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Genres
History / General
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अंग्रेजों द्वारा भारत में सत्ता-हस्तान्तरण, देश-विभाजन और स्वाधीनता-संघर्ष तथा 1947 से पूर्व की मुस्लिम समस्या पर यद्यपि बहुत कुछ लिखा गया है, फिर भी विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना और उससे सम्बन्धित अनेक प्रश्नों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। देश-विभाजन की उस विकराल विभीषिका में लाखों लोगों ने अपने प्राण गवाएँ, सगे-सम्बन्धी, परिवार-जन खोये। जान-माल के इस भीषण संहार, विनाशलीला, दुव्र्यवहार और करोड़ों लोगों को उनकी जन्म-भूमि से विस्थापित करने का मानव इतिहास में दूसरा दृष्टान्त नहीं मिलता।

    जागरूक, अध्ययनशील और विचारवान् राष्ट्रसेवी व लेखक श्री हो. वे. शेषाद्रि ने इस पुस्तक में देश की इस त्रासदी का गहन अध्ययन व आकलन के आधार पर तथ्यपरक एवं यथार्थ विवेचन प्रस्तुत किया है।

देश के स्वतंत्रता संग्राम के विस्तृत इतिहास में वर्ष 1857 की भूमिका डेढ़ सदी बीत जाने के बाद भी न सिर्फ जनमानस में गहरे उतरती जा रही है, बल्कि उसका महत्व भी मुखर हो कर सामने आता जा रहा है इस जन आन्दोलन में अनेकों वीरों ने अपने रक्तप्राण का बलिदान सहर्ष दिया और अंतिम इच्छा यही प्रकट की, कि उनका देश ब्रिटिश राज से मुक्त हो जाए।

यह स्मृतियां केवल इतिहास के पृष्ठों में संजोने के लिए नहीं है बल्कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसार पाने योग्य गौरव गाथा हैं जिन्हें मानना देश को जानने जैसा ही पुण्य कार्य है। बिना आजादी का इतिहास जाने आजादी का मूल्य भला कैसे समझा जा सकता है और उसका मूल्य समझे बगैर हमारी पीढ़ियां उसकी रक्षा के लिए प्रणबद्ध कैसे हो पाएंगी ?

यह रोचक और तथ्यपूर्ण पुस्तक इसी दायित्व का वहन करते सामने आई है और निश्चित रूप से पाठक इसे मूल्यवान पाएंगे।
नारीपना की इन कहानी और कविताओं में नारी किरदारों पर कुछ प्रयोग किये हैं। कहीं वह सकारात्मक है, तो कहीं बिल्कुल गलत पर ये सभी स्त्रियां वर्तमान को वर्तमान में जीती हैं, जो तुलना में पुरुषों में कम देखा है। नारी के सभी रूपों को स्वीकार करना समाज के लिए ज़रूरी है। नकारात्मक आदतें और व्यवहार के लिए भी थोड़ी जगह होनी चाहिए, नहीं तो दुनिया नीरस हो जाती है। आखिर किसी की 100 अच्छी बातें पसंद हैं तो कुछ ख़राब भी झेलो। खैर, मेरे ये प्रयोग आगे जारी रहेंगे आशा है आप सभी का स्नेह व सहयोग बना रहेगा। 2014 में सीमित फोरम्स पर प्रकाशित नारीपना में कुछ नयी रचनाएं जोड़कर इस बार बेहतर एडिशन प्रकाशित कर रहा हूँ। 

मोहित शर्मा 'ज़हन'

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