एकाग्रता का रहस्य (Hindi Sahitya): Ekagrata Ka Rahasya (Hindi Self-help)

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एकाग्रता ही सभी प्रकार के ज्ञान की नींव है, इसके बिना कुछ भी करना सम्भव नहीं है। ज्ञानार्जन के लिए किस प्रकार मन को एकाग्र करना चाहिए इसका दिग्दर्शन इस पुस्तिका में किया गया है। एकाग्र मन एक सर्च लाइट के समान है। सर्चलाइट हमें दूर तथा अँधेरे कोनों में पड़ी वस्तुओं को भी देखने में समर्थ बनाता है
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About the author

स्वामी विवेकानन्द(जन्म: 12 जनवरी,1863 - मृत्यु: 4 जुलाई,1902)

वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों" के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।
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4.4
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Additional Information

Publisher
Bhartiya Sahitya Inc.
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Published on
Nov 27, 2013
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Pages
24
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ISBN
9781613012567
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Language
Hindi
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Genres
Foreign Language Study / Hindi
Self-Help / Motivational & Inspirational
Self-Help / Personal Growth / Memory Improvement
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इंसान का मन विचार निर्माण करने की फैक्टरी है जिससे बिना रुके विचार प्रकट हो रहे रहे हैं। अनचाहे, जमा हो चुके विचारों की वजह से तनाव और दुःख का निर्माण होता है। क्या इन विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है... कोई दिशा दी जा सकती है... या इन्हें रोका जा सकता है... क्या इन विचारों का निर्माण लाभ देनेवाले, सकारात्मक रूप से हो सकता है। इस पुस्तक में सरश्रीजी विचारों के नियमों को समझाते हैं। विचारों को कैसे नियंत्रित किया जाए तथा दिशाहीन विचारों को कैसे उपयुक्त दिशा देकर उनसे कार्य करवाया जाए।विचार नियम क्या है?क्या यह संभाव है विचार नियम के इस्तेमाल से इंसान के द्वारा कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है?क्या यह संभव है कि दो परस्पर विरोधी विचारों के परिणाम वास्तविक जीवन में देखने को मिलते हैं?हमारे जीवन को विचार नियम कब, क्यों और कैसे प्रभावित करते हैं?मन को पुराने नकारात्मक विचारों से मुक्ति कैसे मिले?यह कैसे पता चले कि कोई घटना दिव्य योजना के अनुसार हो रही है या नहीं?हमारे अवचेतन मन की प्रोगामिंग कब और कैसे होती है तथा क्या उस प्रोग्रामिंग को बदला जा सकता है?विचारों के ध्यान के लिए कौनसी मूल बातें हैं?
 दो जादूई शक्तियाँ

‘विचार नियम’... सरश्री के अनमोल कलम से आविष्कृत हुआ अनुपम पुस्तक! लाखों लोगों के जीवन में क्रांति लानेवाला ग्रंथ| इस पुस्तिका में संक्षिप्त में दिए गए सात विचार सूत्र और क्षमा साधना के सात कदम आपको सच्ची सफलता के शिखर पर पहुँचाएँगे|

आज ‘विचार नियम’ पुस्तक का लाभ लेनेवाला हर इंसान प्रेम, आनंद, शांति, समृद्धि और संतुष्टि का वरदान प्राप्त कर रहा है| ‘विचार नियम’ इस विषय के साथ उतना ही दूसरा महत्वपूर्ण विषय यानी सभी बंधनों से मुक्त करनेवाली ‘क्षमा साधना’| इन दोनों विषयों के लगभग सभी पहलू सरश्री ने अनेक प्रवचनों के माध्यम से प्रकाशित किए हैं| प्रस्तुत पुस्तिका इन दो विषयों के विस्तार का सार है|

लक्ष्य चाहे सफल सांसारिक जीवन जीना हो या मोक्ष प्राप्ति, विचारों का विज्ञान जाने बिना इंसान कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता और क्षमा साधना के बिना दुःखदायी भावनाओं से मुक्त नहीं हो सकता| अतः जिसे सर्वोच्च आनंद चाहिए, उसके पास हमेशा यह पुस्तिका होनी चाहिए| तो क्या आप जीवन के सभी स्तरों पर विचार नियम और क्षमा का जादू देखने के लिए तैयार हैं? यदि ‘​हाँ’ तो पुस्तिका के अंदर पढ़ें - सुखी जीवन के सात कदम|

भारतीय उपमहाद्वीप में महात्मा गांधी ने जमीनी स्तर की टेक्नोलॉजी पर जोर दिया और ग्राहक को संपूर्ण व्यावसायिक गतिविधि के केंद्रबिंदु में रखा। जे.आर.डी. टाटा प्रगति की ओर ले जानेवाला बुनियादी ढाँचा लेकर आए। डॉ. होमी जहाँगीर भाभा और प्रो. विक्रम साराभाई ने परमाणु ऊर्जा पर आधारित उच्च टेक्नोलॉजी एवं अंतरिक्ष कार्यक्रमों की शुरुआत की और साथ ही संपूर्णता व प्रवाह के प्राकृतिक नियमों पर जोर दिया। डॉ. भाभा और प्रो. साराभाई के विकासात्मक दर्शन को आगे बढ़ाते हुए डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन ने भारत में हरित क्रांति लाने के लिए एकता के एक और प्राकृतिक सिद्धांत पर काम किया। डॉ. वर्गीज कुरियन ने सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाकर डेयरी उद्योग में एक नई क्रांति ला दी। प्रो. सतीश धवन ने अंतरिक्ष शोध में मिशन प्रबंधन की धारणाओं को विकसित किया।
श्री स्वामी विवेकानन्द द्वारा वेदान्त पर दिये गये भाषणों का संग्रह ‘ज्ञानयोग’ है । इन व्याख्यानों में श्री स्वामीजी ने वेदान्त के गूढ़ तत्त्वों की ऐसे सरल, स्पष्ट तथा सुन्दर रूप से विवेचना की है कि आजकल के शिक्षित जनसमुदाय को ये खूब जँच जाते हैं। उन्होंने यह दर्शाया है कि वैयक्तिक तथा सामुदायिक जीवन-गठन में वेदान्त किस प्रकार सहायक होता है। मनुष्य के विचारों का उच्चतम स्तर वेदान्त है और इसी की ओर संसार की समस्त विचारधाराएँ शनै: शनै: प्रवाहित हो रही हैं । अन्त में वे सब वेदान्त में ही लीन होंगी । स्वामीजी ने यह भी दर्शाया है कि मनुष्य के दैवी स्वरूप पर वेदान्त कितना जोर देता है और किस प्रकार इसी में समस्त विश्व की आशा, कल्याण एवं शान्ति निहित है।
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