Meri Teri Uski Baat

· Lokbharti Prakashan
3.7
3 reviews
Ebook
576
Pages

About this ebook

युगद्रष्टा, क्रांतिकारी और सक्रिय सामाजिक चेतना से संपन्न कथाकार यशपाल की कृतियाँ राजनितिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में आज भी प्रासंगिक हैं ! स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान और स्वातंत्रयोत्तर भारत की दशा-दिशा पर उन्होंने अपनी कथा-रचनाओं में जो लिखा, उसकी महत्ता दस्तावेज के रूप में भी है और मार्गदर्शक वैचारिक के रूप में भी ! 'मेरी तेरी उसकी बात' की पृष्ठभूमि में 1942 का भारत छोडो आन्दोलन है, लेकिन सिर्फ घटनाओं का वर्णन नहीं ! एक दृष्टिसंपन्न रचनाकार की हैसियत से यशपाल ने उसमे खासतौर पर यह रेखांकित किया है कि क्रांति का अभिप्राय सिर्फ शासकों का बदल जाना नहीं, समाज और उसके दृष्टिकोण का आमूल परिवर्तन है ! स्त्री के प्रति प्रगतिशील और आधुनिक नजरिया उनके अन्य उपन्यासों की तरह इस उपन्यास के भी प्रमुख स्वरों में एक है !

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Ratings and reviews

3 reviews
Vikas Lohia
March 18, 2013
This Hindi novel is one of the most comprehensive and timeless epic of all time. Thoroughly enjoyed the read and you get to know a lot about India as it was in early 20th century. Read it about 10 years back and still cherish it. A must read!
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About the author

जन्म : 3 दिसम्बर, 1903, फिरोजपुर छावनी, पंजाब। शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गुरुकुल काँगड़ी, डी.ए.वी. स्कूल, लाहौर और फिर मनोहर लाल हाईस्कूल में हुई। सन् 1921 में वहीं से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। प्रारम्भिक जीवन रोमांचक कथाओं के नायकों-सा रहा। भगत सिंह, सुखदेव, भगवती चरण और आजाद के साथ क्रान्तिकारी कार्यों में खुलकर भाग लिया। सन् 1931 में 'हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना' के सेनापति चन्द्रशेखर आजाद के मारे जाने पर सेनापति नियुक्त। 1932 में पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में गिरफ्तार। 1938 में जेल से छूटने के बाद जीवनपर्यन्त लेखन-कार्य में संलग्न रहे। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : झूठा सच : वतन और देश, झूठा सच : देश का भविष्य, मेरी तेरी उसकी बात, देशद्रोही, दादा कामरेड, मनुष्य के रूप, दिव्या, अमिता, बारह घंटे, अप्सरा का शाप (उपन्यास); धर्मयुद्ध, ओ भैरवी, उत्तराधिकारी, चित्र का शीर्षक, अभिशप्त, वो दुनिया, ज्ञानदान, पिंजरे की उड़ान, तर्क का तूफान, भस्मावृत चिंगारी, फूलो का कुर्ता, तुमने क्यों कहा था मैं सुन्दर हूँ, उत्तमी की माँ, खच्चर और आदमी, भूख के तीन दिन, लैम्प शेड (कहानी-संग्रह); लोहे की दीवार के दोनों ओर, राहबीती, स्वर्गोद्यान : बिना साँप (यात्रा-वृत्तान्त); मेरी जेल डायरी (डायरी); रामराज्य की कथा, गाँधीवाद की शव-परीक्षा, मार्क्सवाद; देखा, सोचा, समझा; चक्कर क्लब, बात-बात में बात, न्याय का संघर्ष, बीबी जी कहती हैं मेरा चेहरा रोबीला है, जग का मुजरा, मैं और मेरा परिवेश, यथार्थवाद और उसकी समस्याएँ, यशपाल का विप्लव (राजनीति/निबन्ध/व्यंग्य/संपादन); सिंहावलोकन (सम्पूर्ण 1-4 भाग) (संस्मरण); नशे-नशे की बात (नाटक); प्रिय पाश (पत्र)। पुरस्कार : देव पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, मंगला प्रसाद पारितोषिक, पद्मभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार। निधन : 26 दिसम्बर, 1976

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