विश्वभर में फैली शाखाओं के साथ हरे कृष्णा बुक्स की शुरुआत 1944 में एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा 'बैक टू गॉडहेड' पत्रिका के साथ हुई थी।
विश्वभर में फैले हमारे अन्य हरे कृष्णा केंद्रों और 1972 में स्थापित हमारे अपने बहुराष्ट्रीय प्रकाशन गृह, भक्ति वेदांत बुक ट्रस्ट (बीबीटी) के साथ, हम 90 से अधिक भाषाओं में भारतीय धर्मग्रंथों के विश्व के सबसे बड़े प्रकाशक बन गए हैं।
स्वामी प्रभुपाद द्वारा लिखित भगवद गीता की अब तक 2.6 करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं और यह विश्व में गीता का सबसे अधिक बिकने वाला संस्करण और विश्व स्तर पर गीता का मानक संदर्भ संस्करण बन गया है।
मुंबई के चौपाटी स्थित इस्कॉन में किताबों की दुकान
पिछली बार अपडेट होने की तारीख
22 अग॰ 2026