गौएँ प्राणियों का आधार तथा कल्याण की निधि है। भूत और भविष्य गौओं के ही हाथ में है। वे ही सदा रहने वाली पुष्टिका कारण तथा लक्ष्मी की जड हैं। गौओं की सेवा में जो कुछ दिया जाता है, उसका फल अक्षय होता है। गौ-माता की आराधना हेतु प्रेमनारायण ने चालीसा की रचना की है।
गौएँ प्राणियों का आधार तथा कल्याण की निधि है। भूत और भविष्य गौओं के ही हाथ में है। वे ही सदा रहने वाली पुष्टिका कारण तथा लक्ष्मी की जड हैं। गौओं की सेवा में जो कुछ दिया जाता है, उसका फल अक्षय होता है। गौ-माता की आराधना हेतु प्रेमनारायण ने चालीसा की रचना की है।