भाव की नाव पर सवार होकर जब वे विचारों के सागर में तिरते हुए कहते हैं कि
“थोड़ा बस्ती से दूर रहते हैं
अपनी मस्ती में चूर रहते हैं”
तो लगता है जैसे कोई फकीर अनहद-नाद के सौंदर्य में घुलमिल गया हो। 'जज़्बात' में इसके स्वर साफ सुनाई पड़ते हैं। यही अग्निवेष त्रिपाठी में रचे-बसे कवि की विशेषता भी है।
एतदर्थ बधाई, साधुवाद एवं 'जज़्बात' काव्य-संग्रह की सफलता हेतु अनंत मंगल कामनायें।
- ओम नारायण शुक्ल
गोपाल नगर, कानपुर नगर
फोन. 9026567679
अग्निवेष त्रिपाठी
पिताश्री - स्व.सुख नारायण शास्त्री
माताश्री - स्व.सिया दुलारी
जन्मतिथि - 7 मई 1955
शिक्षा - साहित्य रत्न
रुचियाँ - कृषि, संगीत, सन्त सेवा
व्यवसाय - सन् 1982 से दवा व्यवसाय, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ
निवास - 117-एच-1/209, पाण्डु नगर, कानपुर
सम्पर्क - 9236114484